जब हर बाढ़ में "मुर्दाबाद" तय है, तो अतिक्रमण हटाने का साहसिक फैसला क्यों नहीं?

Aug 1, 2025 - 14:05
Aug 1, 2025 - 14:05
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जब हर बाढ़ में "मुर्दाबाद" तय है, तो अतिक्रमण हटाने का साहसिक फैसला क्यों नहीं?

गुना (आरएनआई) सरकार जब मुर्दाबाद ही होना है तो भूमाफिया और अतिक्रमणकारियों पर मेहरबानी क्यों? ये गुना के कथित "बड़े पुल" के फोटो हैं। कथित इसलिए कि अब ये सिर्फ नाम का बड़ा पुल है। इस पुल को हमने अपनी मक्कारी, लालच, बेईमानी की नियत से अतिक्रमण करके छोटा कर दिया है। ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1840 में जब हम अंग्रेजों के गुलाम थे, उस दौर में आगरा-बॉम्बे मार्ग का निर्माण कराया था तभी नदी पर ये पुल बना था। इस पुल की मजबूती इस बात की गवाह है कि भारत में हंटर के जोर पर ही अच्छे काम होना संभव है। "हंटर" चाहे अनुशासन का हो या फिर दांडिक कार्यवाही का हो।

इस पुल में पानी निकासी के लिए 05 ओपनिंग हैं। प्रत्येक ओपनिंग की चौड़ाई करीब 05 - 05 मीटर, ऊंचाई करीब 08 - 08 मीटर है। यदि ये पांचों ओपनिंग निर्बाध खुली रहे। इनके आगे पीछे गुनिया नदी/नाले में कोई रुकावट न हो तो नाले में से बाढ़ की स्थिति में पानी तेजी से निकल जाए और पिछले इलाकों में जलस्तर न बढ़े, न ही बाढ़ आए। लेकिन इस पुल के दोनों ओर अस्थाई और स्थाई हर तरह का अतिक्रमण हो चुका है। जो साल दर साल बढ़ ही रहा है।

अपस्ट्रीम (जिस ओर से पानी आता है) में नाले में स्थित माता मंदिर के पीछे की ओर करीब 25 फुट चौड़ाई में दस दस फुट ऊंचाई तक मिट्टी डाल कर अतिक्रमण किया जा चुका है। यहां कतार से पक्के मकान बन गए हैं। मंदिर के सामने किनारे पर निर्मित तीन तीन मंजिल मकानों के लिए भी 25 फुट चौड़ाई में 10 फुट ऊंचाई तक मिट्टी भराव कर मकानों के लिए रास्ता बना लिया गया है। मंदिर के सामने का कुआं भी स्लैब डालकर ढांक दिया है, जिस दिन वजन से स्लैब टूटेगी और जनहानि हुई तो फिर जनता विधायक सांसद कलेक्टर को लेकर नारेबाजी करेगी।

यहां डाउनस्ट्रीम (नाला पार कर जिस ओर पानी बहता है) में तेलघानी की ओर पुल की पहली ओपनिंग के ठीक सामने नाले में तीन तीन मंजिला पक्के मकान नाले में अतिक्रमण कर बने हैं। जिससे बड़े पुल की पांच में से एक ओपनिंग के सामने पक्की रोक बन गई है, मिट्टी भराव से 40 फीसदी मार्ग अवरुद्ध है। इस तरह नाले की ओपनिंग घटकर 60 फीसदी ही रह गई है जो सरकार और प्रशासन को छोड़कर सबको साफ साफ दिखाई देती है। 

ये तो अतिक्रमण का सिर्फ एक उदाहरण है। शहर के सभी नालों के पुल पुलिया के आसपास इसी तरह के अतिक्रमण हैं। पूरे नाले को लोगों ने मुफ्त की जमीन हड़पने की हवस, में पाट दिया है। गोविंद गार्डन कॉलोनी, लूसन बगीचा, नानाखेड़ी जैसे हिस्से में तो कई जगह लोग नाला ही खा गए। इस तरह के कच्चे पक्के अतिक्रमण के कारण नदी नालों के बहाव क्षेत्र में ठोस रुकावट पैदा हो गई है। जिस कारण यहां पानी थमता है और पिछले इलाकों में जलभराव होने से बाढ़ आ जाती है।

जब तक ये अतिक्रमण नहीं हटेंगे, तब तक भारी बारिश होने पर नदी नाले उफनकर आसपास के इलाकों में से पानी का रास्ता तलाशेंगे, इसे कोई नहीं रोक सकता।

कल बाढ़ पीढ़ितों ने शासन प्रशासन की खूब मुर्दाबाद की। जब भी बाढ़ आती है तो मुर्दाबाद हो जाती है। इस भीड़ में निर्दोष पीड़ित लोगों के साथ में वो भी शामिल हो जाते हैं जिन्होंने खुद नदी नालों पर अतिक्रमण कर रखा है। जल संसाधन विभाग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों की धज्जियां उड़ाकर नदी नालों की जमीन पर कॉलोनियों काटकर लोगों को ठग चुके भू माफिया उन्हें अपने पाप ढांकने के लिए आगे कर देते हैं। 

इन्हें वोट मानकर शासन; और कानून व्यवस्था के चलते प्रशासन दवाब में आता है। धीरे धीरे समय कटता जाता है और अगली बाढ़ आने तक चीजें सामान्य हो जाती हैं। ये क्रम चलता रहता है। हालांकि वास्तविक, निर्दोष पीढ़ितों की मांगे सदैव ही जायज होती हैं, मानी जाना चाहिए।

लेकिन सरकार जब आपकी मुर्दाबाद होना ही है तो फिर अतिक्रमण हटाने का कठोर निर्णय लो, प्रशासन को भाजपा-कांग्रेस, मेरा-तेरा, अमीर-गरीब का भेद किए बिना समान दृष्टि से नदी नालों से अतिक्रमण हटाने के लिए फ्री हैंड दो। जिस तरह बाढ़ राहत के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात करते हो, वैसी कुछ दिन अतिक्रमण हटवाने के लिए कर दो, और कानूनी पेचीदगियों से निपटने की तैयारी के साथ योग्य अधिकारियों और कानूनविदों के निर्देशन में अंतिम अतिक्रमण हटाने तक मुहिम चलने दो। 

अतिक्रमण हटेंगे तब ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? हजार पांच सौ अतिक्रमणकारी ही मुर्दाबाद करेंगे ना। लेकिन ढाई लाख की आबादी का ये पूरा शहर हमेशा के लिए सुखी हो जाएगा, दिल से दुआ देगा और जिंदाबाद करेगा। शहर के हित की दृष्टि से, विकास के लिए, सुंदरता के लिए इसके अलावा जनहितकारी कोई दूसरा समाधान नहीं है। राजनैतिक लीपापोती, आश्वासन, मुआवजा तो सिर्फ अगली बाढ़ तक के लिए ही मुर्दाबाद के नारों पर विराम लगाएगा।

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