मार्च में पड़ सकती है भीषण गर्मी, गेहूं-सरसों की पैदावार पर संकट; पारा 40 डिग्री के पार जाने की आशंका
नई दिल्ली (आरएनआई)। मार्च 2026 में देश के कई हिस्सों में असामान्य रूप से तेज गर्मी पड़ने का अनुमान है, जिससे गेहूं और सरसों की फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। India Meteorological Department के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने की संभावना है।
अधिकारियों का कहना है कि मार्च के अंत तक कई राज्यों में दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच सकता है। विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 7 डिग्री तक अधिक रहने का अनुमान है। यही राज्य देश के लगभग 80 प्रतिशत गेहूं और सरसों का उत्पादन करते हैं, इसलिए यहां की मौसम स्थिति का सीधा प्रभाव राष्ट्रीय उत्पादन पर पड़ेगा।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक और खाद्य तेलों का प्रमुख आयातक है। वर्ष 2026 में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही थी, जिससे गेहूं निर्यात बढ़ाने और पाम, सोयाबीन तथा सूरजमुखी तेल के महंगे आयात में कमी लाने की संभावना थी। हालांकि, फसलों के दाना भरने और पकने के महत्वपूर्ण चरण में अधिक तापमान पड़ने से उपज घट सकती है। इससे कुल उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
वर्ष 2022 में भी फरवरी और मार्च की असामान्य गर्मी के कारण गेहूं उत्पादन प्रभावित हुआ था, जिसके चलते भारत ने निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस वर्ष किसानों ने रिकॉर्ड क्षेत्रफल में गेहूं और सरसों की बुवाई की है, जिससे उम्मीदें अधिक थीं।
मुंबई स्थित ब्रोकरेज संस्था फिलिप कैपिटल इंडिया में जिंस अनुसंधान के उपाध्यक्ष अश्विनी बंसोड़ ने कहा कि यदि मार्च के पहले पखवाड़े में लगातार सामान्य से अधिक तापमान बना रहता है तो फसलों पर गर्मी का दबाव बढ़ सकता है। मौसम विभाग इस सप्ताह के अंत तक मार्च के तापमान को लेकर आधिकारिक पूर्वानुमान जारी कर सकता है।
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