चाचौड़ा-बीनागंज नगर परिषद में डीजल खर्च पर उठे सवाल, दो वर्षों के आंकड़ों ने खोली परतें
चाचौड़ा-बीनागंज की नगर परिषद में डीजल खपत को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। दो वित्तीय वर्षों के तुलनात्मक आंकड़ों ने खर्च में भारी अंतर दिखाते हुए गड़बड़ी और संभावित भ्रष्टाचार के आरोपों को हवा दे दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में नगर परिषद द्वारा करीब 1.10 करोड़ रुपये का डीजल खरीदा गया, जब व्यवस्थाएं परिषद अध्यक्ष के अधीन संचालित थीं। वहीं, अगले ही वित्तीय वर्ष 2025-26 में उन्हीं संसाधनों और मशीनों के संचालन के बावजूद डीजल खर्च घटकर लगभग 40 लाख रुपये रह गया।
इस अंतर को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या पिछले वर्ष में डीजल खपत के नाम पर अनियमितताएं हुईं। वर्तमान में पदस्थ सीएमओ श्री मिश्रा के कार्यकाल में बेहतर प्रबंधन के चलते करीब 70 लाख रुपये की बचत का दावा किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि अब फर्जी बिलिंग और अनावश्यक उपयोग पर अंकुश लगा है।
मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद कोई निजी संस्था नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश शासन की इकाई है, इसलिए यहां पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या जांच करता है और यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
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