अधिकारियों को ‘माननीय’ कहने पर हाईकोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी, तय किया संबोधन का दायरा
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने ‘Hon’ble’ (माननीय) संबोधन के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टता देते हुए कहा है कि किसी भी प्रशासनिक अधिकारी—चाहे वह कलेक्टर, एसपी या किसी भी स्तर का वरिष्ठ अधिकारी क्यों न हो—को ‘माननीय’ नहीं कहा जा सकता। अदालत ने इस संबंध में दायर एक याचिका का निस्तारण करते हुए प्रोटोकॉल की सीमाएं स्पष्ट कर दीं।
अदालत के अनुसार ‘माननीय’ संबोधन का उपयोग केवल संवैधानिक और न्यायिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए निर्धारित है, जैसे न्यायाधीश, राज्यपाल, राष्ट्रपति या विधायिका के निर्वाचित प्रतिनिधि। प्रशासनिक सेवा में कार्यरत अधिकारी, भले ही वे उच्च पदों पर हों, इस श्रेणी में नहीं आते।
इस निर्णय के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकारी पत्राचार, आधिकारिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक मंचों पर संबोधन करते समय तय प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होगा। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को प्रशासनिक और सरकारी कार्यप्रणाली में अनुशासन और स्पष्टता लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से संबोधनों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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