स्मार्ट मीटर पर बड़ी राहत: प्रीपेड की अनिवार्यता खत्म, उपभोक्ताओं को मिला विकल्प का अधिकार
नई दिल्ली (आरएनआई) देशभर के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से चल रही लड़ाई के बाद केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने अपने पहले के आदेश में संशोधन करते हुए स्मार्ट मीटर को लेकर प्रीपेड व्यवस्था की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। 1 अप्रैल 2026 को जारी नई अधिसूचना के तहत अब उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड, दोनों में से किसी भी मोड को चुनने की स्वतंत्रता दी गई है।
इस फैसले को उपभोक्ताओं की बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि पहले जारी निर्देशों में जहां भी संचार नेटवर्क उपलब्ध था, वहां स्मार्ट मीटर केवल प्रीपेड मोड में लगाए जाने की बाध्यता थी। बिजली कंपनियां इसी आदेश का हवाला देकर उपभोक्ताओं पर प्रीपेड मीटर थोप रही थीं, जिसका देशभर में विरोध हो रहा था।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मुद्दे को लगातार उठाया और केंद्र सरकार के सामने यह दलील रखी कि यह व्यवस्था विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का उल्लंघन है। इस कानून के अनुसार, उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्पों में से चुनने का अधिकार होना चाहिए।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह देश के सभी बिजली उपभोक्ताओं की बड़ी जीत है। उन्होंने बताया कि परिषद ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को लगातार अवगत कराया था कि मौजूदा आदेश कानून के खिलाफ है। आखिरकार केंद्र सरकार के निर्देश पर केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने अपनी गलती सुधारते हुए संशोधन जारी किया।
नई अधिसूचना के अनुसार, अब जिन क्षेत्रों में संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां स्मार्ट मीटर तो लगाए जाएंगे, लेकिन प्रीपेड मोड केवल उपभोक्ता की सहमति पर ही लागू होगा। यानी अब उपभोक्ताओं पर किसी भी तरह की बाध्यता नहीं होगी और वे अपनी सुविधा के अनुसार भुगतान प्रणाली चुन सकेंगे।
इस निर्णय के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बिजली उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शिता और सुविधा मिलेगी, साथ ही कंपनियों द्वारा मनमानी पर भी रोक लगेगी।
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