चंडीगढ़ में भाजपा कार्यालय के बाहर ग्रेनेड हमला, भारी सुरक्षा के बावजूद हमलावर फरार; पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
चंडीगढ़ (आरएनआई)। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और चौबीसों घंटे नाकाबंदी के दावों के बीच चंडीगढ़ में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर हुए ग्रेनेड हमले ने पुलिस की तैयारियों की पोल खोल दी। हैरानी की बात यह है कि शहर में 1500 से 1600 पुलिसकर्मी तैनात थे और करीब 50 नाके सक्रिय थे, इसके बावजूद हमलावर शहर में दाखिल होकर वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो गए।
घटना ऐसे समय में हुई जब प्रशासन ने हाल ही में हुई आपराधिक घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने के निर्देश दिए थे। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर हर थाना क्षेत्र में अतिरिक्त नाके लगाए गए थे और चौकियों के स्तर पर भी निगरानी बढ़ाई गई थी। इसके बावजूद हमलावरों ने भाजपा कार्यालय को निशाना बनाते हुए ग्रेनेड फेंका और बिना किसी रोक-टोक के मौके से भाग निकले।
बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर हमला हुआ, वहां पहले से ही Central Reserve Police Force और पंजाब पुलिस के जवान तैनात थे। गेट पर भी सुरक्षाकर्मी मौजूद थे, लेकिन इसके बावजूद हमला कब और कैसे हुआ, इसकी जानकारी तक मौके पर मौजूद जवानों को नहीं लग सकी।
गौरतलब है कि चंडीगढ़ में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी शहर में ग्रेनेड और बम हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 11 सितंबर 2024 को सेक्टर-10 में ग्रेनेड हमला हुआ था, जिसकी जांच में Babbar Khalsa International के आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा और गैंगस्टर हैप्पी पासिया का नाम सामने आया था। वहीं, 26 नवंबर 2024 को सेक्टर-26 के दो नाइट क्लबों के बाहर हुए धमाकों की जिम्मेदारी Lawrence Bishnoi और Goldy Brar गैंग ने ली थी।
हर बड़े हमले के बाद जांच की जिम्मेदारी पंजाब पुलिस, दिल्ली पुलिस या National Investigation Agency को सौंपी जाती रही है। ताजा घटना के बाद एक बार फिर चंडीगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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