असम चुनावी दंगल: चाय बागानों में उतरे हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन, मजदूरों से सीधा संवाद
रांची (आरएनआई) असम विधानसभा चुनाव के मद्देनजर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने चाय बागानों में पहुंचकर चुनावी सरगर्मी को नया रंग दिया। दोनों नेताओं ने मजदूरों के बीच समय बिताते हुए न केवल उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि जमीनी हकीकत को करीब से समझने की कोशिश भी की।
चाय बागानों के दौरे के दौरान हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन मजदूरों के साथ घुल-मिल गए। उन्होंने खुद चाय की पत्तियां तोड़ीं, मजदूरों के साथ बातचीत की और उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी ली। इस दौरान कल्पना सोरेन ने चाय तोड़ते हुए अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जो तेजी से वायरल हो रही हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक मजदूर के कच्चे मकान तक भी पहुंचे, जहां अंधेरे में टॉर्च की रोशनी के सहारे अंदर जाकर उन्होंने हालात का जायजा लिया। वहां की स्थिति देखकर उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि असम के चाय बागान मजदूरों की हालत बेहद खराब है और उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
इस दौरान उन्होंने झारखंड सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि उनके राज्य में अबुआ आवास योजना के तहत गरीबों को पक्के मकान दिए जा रहे हैं और कई क्षेत्रों में मुफ्त बिजली की सुविधा भी दी जा रही है। उन्होंने असम की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आदिवासी समाज का केवल वोट के लिए इस्तेमाल किया गया है, जबकि उन्हें योजनाओं का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा।
हेमंत सोरेन ने यह भी दावा किया कि यदि असम में झारखंड मुक्ति मोर्चा को सत्ता मिलती है, तो झारखंड की तरह ही जनकल्याणकारी योजनाएं वहां भी लागू की जाएंगी। इस पूरे दौरे को चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़कर समर्थन हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
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