अवधूत कपाली बाबा भक्तों के साथ शिवरात्रि की मध्यरात्रि में भगवान शिव की किया विशेष पूजा अर्चना

Feb 16, 2026 - 18:58
Feb 16, 2026 - 18:58
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\अवधूत कपाली बाबा भक्तों के साथ शिवरात्रि की मध्यरात्रि में भगवान शिव की किया विशेष पूजा अर्चना 

 
सुलतानपुर (आरएनआई)अघोरपीठ बाबा सत्यनाथ मठ अल्देमऊ नूरपुर कादीपुर के पीठाधीश्वर अवधूत उग्र चण्डेश्वर कपाली बाबा महाशिवरात्रि पर्व पर मठ परिसर में कादेश्वर महादेव एवं महाकाल शनिदेव अवसान माता मंदिर शाहगंज रोड रानीपुर कायस्थ गांव में महाकाल शिवलिंगम और माता पार्वती के साथ गठबन्धन कर भगवान की विशेष पूजा अर्चना की गई।इस अवसर पर महाकालेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक रुद्रार्चन महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि में अवधूत कपाली बाबा द्वारा किया गया।

 इस अवसर पर अवधूत कपाली बाबा ने बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन (विवाह), शिव के ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होने या उनके तांडव नृत्य की रात माना जाता है। यह अज्ञानता और अंधकार को दूर कर आध्यात्मिक जागृति (जागरण) और शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक है। सबसे लोकप्रिय कथा के अनुसार, इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, जो वैराग्य से गृहस्थ जीवन में उनके प्रवेश का प्रतीक है।

ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य: शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात को भगवान शिव निराकार से साकार रूप में आए और पहली बार ज्योतिर्लिंग (शिवलिंग) के रूप में प्रकट हुए थे।समुद्र मंथन (नीलकंठ): समुद्र मंथन के दौरान निकला विष शिव जी ने पी लिया था, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। इस विनाशकारी विष से सृष्टि की रक्षा करने के उपलक्ष्य में भी यह रात मनाई जाती है।कुछ मान्यताएं यह भी मानती हैं कि इसी रात शिव जी ने सृष्टि के सृजन, पालन और संहार का तांडव नृत्य किया था। महाशिवरात्रि को अज्ञान निद्रा से जागने और विषय-विकारों को नष्ट करने की रात माना जाता है। भक्त पूरी रात जागकर (जागरण), उपवास रखकर और शिवलिंग पर अभिषेक कर भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो आत्मा का परमात्मा से मिलन का प्रतीक है।

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