यूजीसी के नए बिल पर विवाद: समिति की सिफारिशों को लेकर दिग्विजय सिंह पर उठे सवाल
यूजीसी के प्रस्तावित नए बिल को लेकर राजनीतिक गलियारों में विवाद तेज हो गया है। इस बिल की समीक्षा के लिए गठित संसदीय समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह हैं। समिति की सिफारिशों पर अब यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ अहम विषयों को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया।
नई दिल्ली (आरएनआई) यूजीसी के प्रस्तावित नए बिल को लेकर राजनीतिक गलियारों में विवाद तेज हो गया है। इस बिल की समीक्षा के लिए गठित संसदीय समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह हैं। समिति की सिफारिशों पर अब यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ अहम विषयों को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया।
आलोचकों का कहना है कि समिति की रिपोर्ट में दो महत्वपूर्ण मुद्दों को विलोपित कर दिया गया—पहला, सभी वर्गों को समान रूप से पीड़ित माने जाने का प्रावधान और दूसरा, झूठी शिकायतों पर कार्रवाई से संबंधित नियम। इन दोनों बिंदुओं को हटाए जाने से समाज में भ्रम और असंतोष फैलने की आशंका जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन मुद्दों के हटने के बाद, उनके पक्ष में या विरोध में एकतरफा प्रचार भी विभिन्न माध्यमों से किया गया, जिससे आम जनता के बीच गलत संदेश गया। इससे आरक्षित और गैर-आरक्षित वर्गों के बीच वैचारिक टकराव की स्थिति बनाई गई।
इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस की व्यापक राजनीतिक सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि जाति आधारित राजनीति के जरिए समाज को सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग जैसे खांचों में बांटने की कोशिश की जा रही है। दिग्विजय सिंह की भूमिका को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार अब इस पूरे मामले पर नई समिति गठित करने की तैयारी में है, जिसमें सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए भेदभावपूर्ण प्रावधानों को समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह विवाद केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक एकता और राजनीति की दिशा से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और सार्वजनिक मंचों पर बहस और तेज होने की संभावना है।
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