योगेश्वर धाम में सुदामा चरित्र और कंस वध की दिव्य कथा से अभिसिंचित हुआ श्रद्धा का अमृत प्रवाह
कथा व्यास शिवानी मिश्रा के श्रीमुख से साकार हुई भक्ति, मित्रता और धर्म विजय की अनुपम अनुभूति
हरदोई (आरएनआई) जनपद के पावन तीर्थस्थल योगेश्वर धाम, अटवा असिगाव में प्रवाहित श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस का वातावरण भक्ति, करुणा और आध्यात्मिक चेतना के दिव्य आलोक से आलोकित हो उठा। कथा व्यास शिवानी मिश्रा के ओजस्वी एवं रसपूर्ण श्रीमुख से सुदामा चरित्र तथा अत्याचारी कंस वध की अलौकिक कथा का ऐसा भावपूर्ण चित्रण हुआ कि श्रोतागण भाव-सागर में अवगाहित होकर भक्ति के अमृत में सराबोर हो उठे।
कथा व्यास ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि यह प्रसंग केवल दो मित्रों की भेंट नहीं, अपितु आत्मीयता, समर्पण और निष्कलुष भक्ति का कालजयी प्रतीक है। जब निर्धनता और अभाव से व्यथित सुदामा अपने सखा श्रीकृष्ण के दर्शनार्थ द्वारिका पहुँचे, तब भगवान ने राजसी वैभव का परित्याग कर जिस प्रेम और विनय के साथ उनका आलिंगन किया, वह दृश्य भक्त और भगवान के मध्य अटूट संबंध की दिव्य परिणति का सजीव प्रमाण है। कथा व्यास ने कहा कि सुदामा की झोली में भले ही चावल के कुछ दाने थे, किंतु उनके हृदय में असीम श्रद्धा और प्रेम का अथाह सागर विद्यमान था, और यही भाव भगवान को प्रिय हुआ।
उन्होंने भाव-विह्वल स्वर में कहा कि ईश्वर के द्वार पर धन और वैभव का नहीं, अपितु श्रद्धा, समर्पण और निष्कपट प्रेम का मूल्य होता है। सुदामा ने अपने दुःखों का वर्णन किए बिना ही ईश्वर की करुणा प्राप्त की, जो इस सत्य का उद्घोष है कि भगवान भक्त के हृदय की मौन पुकार भी सुन लेते हैं।
इसके उपरांत कथा व्यास ने कंस वध का ओजस्वी और सजीव चित्रण करते हुए बताया कि कंस अहंकार, अत्याचार और अधर्म का साकार प्रतीक था, जिसने अपने अत्याचारों से संपूर्ण पृथ्वी को पीड़ा और भय से व्याकुल कर दिया था। किंतु जब अधर्म अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचा, तब धर्म की स्थापना हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने उसका संहार कर सत्य, न्याय और धर्म की पुनर्स्थापना की। यह प्रसंग इस सनातन सत्य का उद्घोष करता है कि अधर्म चाहे जितना भी प्रबल क्यों न हो, अंततः धर्म का ही विजय-ध्वज फहराता है।
कथा के दौरान वातावरण “राधे-कृष्ण” और “हरे कृष्ण” के पावन उद्घोषों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति के अश्रु और हृदय में दिव्य शांति का अनुभव स्पष्ट परिलक्षित हो रहा था। सम्पूर्ण परिसर मानो भक्ति की अविरल धारा में निमग्न हो गया, जहां प्रत्येक हृदय प्रभु प्रेम की अनुभूति से स्पंदित हो रहा था।
कथा के उपसंहार पर श्रद्धालुओं ने आरती में सहभागिता कर प्रभु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की और जीवन में धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर क्षेत्र के असंख्य श्रद्धालु, भक्तगण एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे, और योगेश्वर धाम का पावन प्रांगण आध्यात्मिक चेतना और दिव्य आस्था के प्रकाश से अनुप्राणित होता रहा।
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