प्रियांक खरगे का तीखा हमला: आरएसएस को बताया ‘शैतान’, भाजपा को उसकी छाया; फंडिंग और जवाबदेही पर उठाए सवाल

Feb 16, 2026 - 11:51
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प्रियांक खरगे का तीखा हमला: आरएसएस को बताया ‘शैतान’, भाजपा को उसकी छाया; फंडिंग और जवाबदेही पर उठाए सवाल

बंगलूरू (आरएनआई)। कर्नाटक की राजनीति में बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोलते हुए उसे “शैतान” करार दिया और भारतीय जनता पार्टी को उसकी “छाया” बताया। उन्होंने आरएसएस की फंडिंग, कानूनी स्थिति और संवैधानिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाते हुए मनी लॉन्ड्रिंग तक के आरोप लगाए।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि आरएसएस के बिना भाजपा का अस्तित्व कमजोर पड़ जाता। उनके मुताबिक अगर आरएसएस नहीं होता तो भाजपा की हालत और खराब होती। उन्होंने कहा, “हम आज शैतान की छाया से लड़ रहे हैं। शैतान कौन है? आरएसएस। उसकी छाया कौन है? भाजपा। अगर हम छाया से नहीं बल्कि असली स्रोत से लड़ें, तो देश अपने आप बेहतर हो जाएगा।”

खरगे ने आरएसएस की फंडिंग को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब संगठन से उसके धन के स्रोत पूछे जाते हैं, तो “गुरु दक्षिणा” का हवाला दिया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि कोई और व्यक्ति या संस्था अपना झंडा लगाकर चंदा इकट्ठा करे, तो क्या सरकार और आरएसएस उसे वैध मानेंगे? मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस जवाब दिए कोई भी संस्था जवाबदेही से नहीं बच सकती। उनका कहना था कि जब तक आरएसएस संविधान और कानून के तहत पंजीकृत नहीं होता, तब तक वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।

धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए खरगे ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का स्वरूप अलग है, जबकि आज के समय में धर्म की व्याख्या अलग तरीके से की जा रही है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

फंडिंग को लेकर आरोपों को आगे बढ़ाते हुए खरगे ने दावा किया कि आरएसएस का 2,500 से अधिक संगठनों का नेटवर्क है, जिनमें अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में सक्रिय इकाइयां भी शामिल हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब आम नागरिकों और संस्थाओं को टैक्स देना पड़ता है और हर लेन-देन का हिसाब देना होता है, तो आरएसएस को इससे अलग क्यों रखा जाए।

कानूनी स्थिति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस एक अपंजीकृत संगठन है और यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या वह खुद को कानून और संविधान से ऊपर मानता है। इस दौरान उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस पुराने बयान का जिक्र किया, जिसमें संगठन को व्यक्तियों का समूह बताया गया था। खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि अगर यह केवल व्यक्तियों का समूह है, तो क्लब और एसोसिएशन भी तो ऐसे ही होते हैं—वे पंजीकृत होते हैं और टैक्स भी देते हैं।

मोहन भागवत के अधिक बच्चों को लेकर दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए खरगे ने कहा कि जो स्वयं विवाह नहीं करते, वे दूसरों को परिवार बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सार्वजनिक मंचों पर कुछ और, जबकि निजी तौर पर कुछ और कहती है और इसकी नीतियों का सबसे ज्यादा असर गरीब परिवारों पर पड़ता है।

इस बयान के बाद कर्नाटक की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और बढ़ने के आसार हैं।

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