ईरान के परमाणु मुद्दे पर ट्रंप से मुलाकात करेंगे नेतन्याहू, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा नीति पर भी होगी अहम चर्चा
वॉशिंगटन (आरएनआई) अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव के बीच इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से महत्वपूर्ण मुलाकात होने जा रही है। ओमान में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच हुई हालिया वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है, हालांकि दोनों पक्षों के बीच आगे बातचीत जारी रखने की संभावना जताई गई है। इसी पृष्ठभूमि में नेतन्याहू की यह यात्रा कूटनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति ट्रंप इस सप्ताह नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा नीति जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। लेविट ने यह भी बताया कि ट्रंप प्रशासन ऊर्जा क्षेत्र में बड़े स्तर पर नियमों में ढील देने की दिशा में कदम उठाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ओबामा प्रशासन के दौरान 2009 में किए गए ‘एंडेंजर्मेंट फाइंडिंग’ को औपचारिक रूप से रद्द करने वाले हैं, जिसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी डीरेगुलेशन कार्रवाई बताया जा रहा है। इससे अमेरिकी नागरिकों और उद्योगों को भारी नियामकीय बोझ से राहत मिलने का दावा किया गया है।
इस बीच वॉशिंगटन रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बातचीत में ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता पर इस्राइल का रुख मजबूती से रखेंगे। ‘द टाइम्स ऑफ इस्राइल’ के अनुसार उन्होंने कहा कि वे वार्ता को लेकर अपने सिद्धांतों और दृष्टिकोण को राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत करेंगे, जो न केवल इस्राइल बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी ने जेफरी एपस्टीन से जुड़े सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने वर्षों पहले ही एपस्टीन से अपने सभी संबंध खत्म कर लिए थे और इस मामले में हमेशा पारदर्शिता बरती है। उनके अनुसार, लाखों दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से यह स्पष्ट होता है कि ट्रंप प्रशासन इस विषय में खुलापन बनाए हुए है।
वहीं, ट्रंप प्रशासन द्वारा 2009 की एंडेंजर्मेंट फाइंडिंग को रद्द करने की योजना को जलवायु नीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यह वही वैज्ञानिक आधार था, जिसके तहत ग्रीनहाउस गैसों को मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा माना गया था और उनके उत्सर्जन को नियंत्रित करने का अधिकार सरकार को मिला था। यह निर्णय ओबामा काल में 2007 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लिया गया था। अब इस फैसले को पलटने की तैयारी से अमेरिका की जलवायु नीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
कुल मिलाकर, ट्रंप और नेतन्याहू की प्रस्तावित मुलाकात न सिर्फ ईरान के परमाणु मुद्दे पर बल्कि मध्य पूर्व की सुरक्षा, ऊर्जा नीति और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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