100 नामों में देवी काली के सौ रूपों का स्तोत्र, पाठ से भय, बाधा और दुखों से मुक्ति

Oct 4, 2025 - 13:07
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100 नामों में देवी काली के सौ रूपों का स्तोत्र, पाठ से भय, बाधा और दुखों से मुक्ति

कोलकाता (आरएनआई) देवी काली को शक्ति, करुणा और भूत-भय नाश करने वाली रूप में पूजा जाता है। अब भक्तों के लिए कालीशतनामस्तोत्र का प्रकाशन किया गया है, जिसमें देवी के सौ दिव्य नामों का वर्णन है।

स्तोत्र की विशेषताएँ:

इसमें देवी के करालवदना, कामिनी, कामाक्षा, कात्यायनी, कालरात्रि, कामरूपा जैसी रूपों का वर्णन है।

भक्त इसे नियमित रूप से पढ़ने और श्रद्धा से जाप करने पर:

भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति

मानसिक शांति और शक्ति

सभी प्रकार के काम और इच्छाओं की पूर्ति

तंत्रसिद्धि और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति

धार्मिक महत्व:

शास्त्रों के अनुसार, इसे सत्यनिष्ठ भक्ति और नियमित पाठ से पढ़ने वाले भक्तों को सभी प्रकार की सुख-समृद्धि, अनंत शक्ति और मोक्ष प्राप्त होता है।

देवी काली के मंत्र, स्तोत्र और कवच का सहस्त्रपठन करने से सभी रोग, बाधाएँ और विघ्न दूर होते हैं।

कैसे करें पाठ:

रात या दिन में किसी पवित्र स्थान पर बैठकर

शुद्ध मन और श्रद्धा से

प्रतिदिन या शतवार (100 बार) जाप करने से
स्तोत्र की शक्ति और आशीर्वाद मिलते हैं।

।। कालीशतनामस्तोत्रं ।।
ॐ करालवदना कालीं कामिनी कमलालया ।
क्रियावती कोटराक्षी कामाक्षा कामसुन्दरी ॥
कपोला च कराला च काशी कात्यायनी कुहूः ।
कङ्काली कालदमनी करुणा कमलार्चिता ॥
कादम्बरी कालहरा कौतुकी कारणप्रिया ।
कृष्णा कृष्णाप्रिया कृष्णपूजिता कृष्णवल्लभा ॥
कृष्णाऽपराजिता कृष्णप्रिया च क्रुष्णरूपिणी ।
कालिका कालरात्रिश्च कुलजा कुलपण्डिता ॥
कुलधर्मप्रिया कामा काम्यकर्म विभूषिता ।
कुलप्रिया कुलरता कुलीन परिपूजिता ॥
कुलज्ञा कमला पूज्या कैलाश नगभूषिता ।
कुटजा केशिनी कामा कामदा कामपण्डिता ॥
करालास्या च कन्दर्पकामिनी कामशोभिता ।
केलिप्रिया केलिरता केलिनी केलिभूषिता ॥
केशवस्य प्रिया केशा काश्मीरा केशवार्चिता ।
कमेश्वरी कामरूपा कामदान विभूषिता ॥
कामहंत्री कूर्ममांसप्रिया कूर्मादि पूजिता ।
केलिनी करकी कारा करकूर्म निषेविनी ॥
कटकेशर मध्यस्था कटकी कटकार्चिता ।
कटप्रिया कटरता कटकूर्म्म निषेविनी ॥
कुमारी पूजनरता कुमारी जनसेविता ।
कुलाचार प्रिया कौलप्रिया कुलनिषेविनी ॥
कुलीना कुलधर्मज्ञा कुलभीति विमर्दिनी ।
कामधर्मप्रिया कामा नित्याकाम स्वरूपिणी ॥
कामरूपा कामहरा काममन्दिर पूजिता ।
कामागारस्वरूपा च कामाख्या कामभूषिता ॥
क्रियाभक्तिरता कामा काञ्चिनी चैव कामदा ।
कोलपुष्पाम्बरा कोला निष्कोला कलहान्तिका ॥
कौशिकी केतिकी कुम्भी कुन्तिला दिविभूषिता ।
इत्येवं श्रृणु चार्व्वाङ्गि रहस्यं सर्व मङ्गलम् ॥
यः पठेत् परमा भक्त्या स शिवी नाऽत्र संशयः ।
शतनाम प्रसादेन किं न सिध्यन्ति भूतले ॥
ब्रह्माविष्णुश्च रुद्रश्च वासवाद्या दिवौकराः ।
सहस्त्रपठनाद्देवि सर्वे च विगतज्वराः ॥
नास्ति नास्ति महामाये तंत्रमध्ये कथञ्चन ।
कपया च विना देवि विना भक्त्या महेश्वरी ॥
प्रसन्ना स्यात् करालास्या स्तवपाठाद्दिगम्बरा ।
सत्यं वच्मि महेशानि अतः परतरं न हि ॥
न गोलोके न वैकुण्ठे न च कैलाश मन्दिरे ।
अतः परतरा विद्या स्तोत्रं कवचमेव च ॥
त्रिलोकेषु जगद्धात्री नास्ति नास्ति कदाचन ।
रात्रावपि दिवाभागे सन्ध्यायां वा सुरेश्वरी ॥
प्रजपेत् भक्तिभावेन रहस्यं स्तवमुत्तमम् ।
शतनाम प्रसादेन मंत्रसिद्धिः प्रजायते ॥
कुजवारे चतुर्दश्यां निशाभागे पठेत्तु यः ।
स कृती सर्वशास्त्रज्ञः स कुलीनः सदा शुचिः ॥
सकुलज्ञः सकालज्ञःस धर्मज्ञो महीतले ।
प्राप्नोति देवदेवेशि सत्यं परम सुन्दरी ॥
स्तवपाठाद् वरारोहे किं न सिध्यन्ति भूतले ।
आणिमाद्यष्टसिद्धिश्च भवत्येव न संशयः ॥
रात्रौ बिल्वतलेऽश्वत्थमूले ऽपराजितातले ।
प्रपठेत् कालिकास्तोत्रं यथाभक्त्या महेश्वरी ॥
शतवार प्रपण्नान्मंत्रसिद्धिं भवेद् ध्रुवम् ॥

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Subir Sen Founder, RNI News