सहरिया क्रांति ने पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन : आदिवासी भूमि की फर्जी रजिस्ट्रियों पर उच्चस्तरीय जांच की मांग

Dec 23, 2025 - 17:07
Dec 23, 2025 - 17:07
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सहरिया क्रांति ने पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन : आदिवासी भूमि की फर्जी रजिस्ट्रियों पर उच्चस्तरीय जांच की मांग

शिवपुरी (आरएनआई) आदिवासी समाज की जमीनों पर हो रहे कथित संगठित षड्यंत्र के खिलाफ सहरिया क्रांति ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि शासन द्वारा आदिवासियों को आजीविका और सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य से प्रदत्त विक्रय से वर्जित पट्टों की भूमि को योजनाबद्ध तरीके से विक्रय योग्य दर्शाया जा रहा है, जो कानून का खुला उल्लंघन और आदिवासी अस्तित्व पर सीधा प्रहार है।

ज्ञापन में बताया गया कि जिले में हाल के दिनों में दो ऐसी रजिस्ट्रियां सामने आई हैं, जिनमें विक्रय से वर्जित आदिवासी भूमि का अवैध क्रय-विक्रय किया गया। प्रारंभिक तथ्यों के अनुसार यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि गिरोहबद्ध नेटवर्क का हिस्सा है, जो लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है। सहरिया क्रांति ने इस नेटवर्क में कुछ व्यक्तियों की भूमिका को प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग की।

संगठन का आरोप है कि आदिवासियों को गुमराह कर फर्जी शपथपत्र तैयार कराए जा रहे हैं, फर्जी हस्ताक्षर किए जा रहे हैं, शासकीय अधिकारियों की जाली सील व हस्ताक्षर का उपयोग हो रहा है और पंजीयन कार्यालयों तक दस्तावेज पहुंचाकर संगठित ठगी की जा रही है। यह कृत्य भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा भूमि राजस्व कानूनों का उल्लंघन है।

सहरिया क्रांति ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रकरण की जांच वरिष्ठ अधिकारियों या विशेष जांच दल से कराई जाए, विगत वर्षों में हुई सभी विक्रय से वर्जित आदिवासी भूमि की रजिस्ट्रियों की विशेष जांच हो, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह को चिन्हित कर गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित आदिवासियों पर किसी भी प्रकार का दबाव तत्काल रोका जाए। संगठन ने दोषियों के खिलाफ कठोर धाराओं में प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्रवाई की अपेक्षा जताई।

ज्ञापन के माध्यम से यह भी कहा गया कि आदिवासी समाज पहले से ही सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से कमजोर है, ऐसे में प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप कर उनकी जमीन और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।

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