‘जब मुंह खोला तो बुरा बोला’, शंकराचार्य विवाद पर अखिलेश का तंज—बोले, आजकल सीएम का मतलब ‘करप्ट माउथ’
लखनऊ (आरएनआई)। राजधानी लखनऊ में रविवार को समाजवादी पार्टी मुख्यालय पर सियासी हलचल तेज नजर आई, जब अखिलेश यादव की मौजूदगी में पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने औपचारिक रूप से समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। इस मौके पर तीन महिला नेत्रियों समेत कुल सात नेताओं ने सपा की सदस्यता ग्रहण की। नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में जाना पहले से तय माना जा रहा था, जिसकी रविवार को आधिकारिक घोषणा कर दी गई। वह इससे पहले बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनकी अच्छी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है।
पार्टी में शामिल होने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अखिलेश यादव से अपने पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि वह उनके नेतृत्व में काम करेंगे और पार्टी को मजबूत करने के लिए सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में युवाओं और छात्रों के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए। देश में पहली बार बेरोजगारी भत्ता और छात्रों को लैपटॉप देने की पहल सपा सरकार ने की थी। शेरो-शायरी के जरिए उन्होंने माहौल को उत्साहपूर्ण बनाए रखा और अंत में ‘जय समाजवाद’ के नारे के साथ अपनी बात समाप्त की।
इस दौरान अखिलेश यादव ने राजनीतिक विरोधियों पर तीखे तंज कसे। उन्होंने कहा कि आज हमारे पास फूल आ रहे हैं और किसी और का फूल मुरझाता जा रहा है। शंकराचार्य से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा कि कुछ लोग उनका भी अपमान कर रहे हैं, जबकि शंकराचार्य शंका से परे होते हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि कुछ नेताओं की भाषा ऐसी है कि “जब मुंह खोला, तब बुरा बोला।”
मुख्यमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए सपा मुखिया ने कहा कि आजकल सीएम का मतलब ‘करप्ट माउथ’ हो गया है। उन्होंने दिल्ली और लखनऊ दोनों की हवा खराब होने की बात कहते हुए प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। बिना नाम लिए योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री खिलाड़ी तो हैं, लेकिन खेल नहीं पा रहे हैं। उन्होंने मंझा, गांजा और कानून-व्यवस्था के मुद्दों के साथ-साथ जनसुनवाई में सांड घुसने जैसी घटनाओं का जिक्र कर सरकार को घेरा।
अखिलेश यादव ने राफेल सौदे का मुद्दा उठाते हुए मेक इन इंडिया पर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की जा रही है, इसी वजह से पंचायत चुनाव में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों से पहले अंगूठा लगवाया जाता था, अब उनसे फार्म-7 में दस्तखत कराए जा रहे हैं। सपा मुखिया ने एक बार फिर जातीय जनगणना की मांग दोहराई।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में शामिल होने से पार्टी को एक मजबूत मुस्लिम चेहरा मिला है। आजम खां के लंबे समय से जेल में रहने के कारण पार्टी के पास जमीनी स्तर पर प्रभावी मुस्लिम नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही थी। ऐसे में नसीमुद्दीन की एंट्री को सपा के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
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