भ्रष्टाचार पर सरकार का बड़ा एक्शन: समाज कल्याण विभाग के चार अधिकारी बर्खास्त, तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में कटौती

Nov 10, 2025 - 10:05
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भ्रष्टाचार पर सरकार का बड़ा एक्शन: समाज कल्याण विभाग के चार अधिकारी बर्खास्त, तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में कटौती

लखनऊ (आरएनआई)। उत्तर प्रदेश सरकार ने समाज कल्याण विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए चार जिला समाज कल्याण अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। वहीं, तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में स्थायी कटौती और करोड़ों रुपये की वसूली के आदेश दिए गए हैं। उप्र लोक सेवा आयोग ने भी इन बर्खास्तगियों को मंजूरी प्रदान कर दी है।

राज्य के समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण की निगरानी में इन सभी मामलों की गहन जांच की गई। मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए और गबन की गई सरकारी धनराशि की पूरी रिकवरी सुनिश्चित की जाए।

बर्खास्त अधिकारी
बर्खास्त किए गए अधिकारियों में श्रावस्ती की तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मीना श्रीवास्तव, मथुरा के करुणेश त्रिपाठी, हापुड़ के संजय कुमार ब्यास और शाहजहांपुर के राजेश कुमार शामिल हैं। मीना श्रीवास्तव वर्तमान में भदोही में तैनात थीं, जबकि अन्य तीन अधिकारी निलंबन के दौरान मुख्यालय से संबद्ध थे।

मीना श्रीवास्तव (श्रावस्ती):
मार्च 2008 से अप्रैल 2012 तक तैनाती के दौरान मुख्यमंत्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना और शादी-बीमारी योजना में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं कीं। लाभार्थियों के खातों में हेरफेर और छात्रवृत्ति धनराशि के गबन में संलिप्त पाई गईं।

करुणेश त्रिपाठी (मथुरा):
निजी आईटीआई संस्थानों को अनियमित रूप से छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान कर 2.53 करोड़ रुपये की वित्तीय हेराफेरी की। फर्जी छात्रों के नाम पर धन निकासी की गई, जिनकी उम्र 2 से 51 वर्ष तक दर्ज थी। बर्खास्तगी के साथ 19.25 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश दिया गया है।

संजय कुमार ब्यास (हापुड़):
वर्ष 2012-13 में छात्रवृत्ति के 2.74 करोड़ रुपये छात्रों के बैंक खातों में भेजने के बजाय शिक्षण संस्थानों के खातों में ट्रांसफर किए। वेबसाइट पर लाभार्थियों के विवरण में फर्जीवाड़ा किया गया। उनसे 3.23 करोड़ रुपये की वसूली की जाएगी।

राजेश कुमार (शाहजहांपुर):
वर्ष 2022-23 में राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थियों के खाते बदलकर अपात्रों को लाभ पहुंचाया। उनके खिलाफ 2.52 करोड़ रुपये की रिकवरी का आदेश जारी हुआ है।

सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई

श्रीभगवान (अौरेया):
वर्ष 2018 से 2020 तक वृद्धावस्था पेंशन योजना में गबन किया। 251 लाभार्थियों के खाते बदलकर अन्य लोगों को भुगतान किया गया। उनसे 20 लाख रुपये की वसूली और पेंशन से 10% स्थायी कटौती का आदेश दिया गया है।

विनोद शंकर तिवारी (मथुरा):
2015 से 2019 के बीच 11 मान्यताविहीन संस्थानों को 2.53 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति जारी की। 5133 फर्जी छात्रों को 9.69 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। उनसे 1.96 करोड़ रुपये की वसूली और पेंशन से 50% कटौती का आदेश दिया गया है।

समाज कल्याण विभाग की इस सख्त कार्रवाई को सरकार के “शून्य सहनशीलता” वाले रुख का उदाहरण माना जा रहा है। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि “भ्रष्टाचार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता के हक की एक-एक पाई की वसूली कर दोषियों को सजा दी जाएगी।”

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