झकरई गांव में शांति महोत्सव का भव्य समापन, डॉ. प्रेम रावत का शांति संदेश सुन भाव-विभोर हुए श्रोता

Feb 15, 2026 - 20:20
Feb 15, 2026 - 20:23
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झकरई गांव में शांति महोत्सव का भव्य समापन, डॉ. प्रेम रावत का शांति संदेश सुन भाव-विभोर हुए श्रोता

एटा (आरएनआई) अलीगंज तहसील अंतर्गत झकरई गांव में 5 फरवरी से आयोजित शांति महोत्सव का समापन रविवार को अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन दोपहर में विश्व शांति दूत एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. प्रेम रावत का विशेष शांति संदेश वीडियो माध्यम से प्रसारित किया गया, जिसमें उनके जीवन, उनके आध्यात्मिक दृष्टिकोण तथा विश्वभर में किए जा रहे मानव कल्याण और शांति प्रयासों का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया गया। संदेश को सुनकर उपस्थित हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि डॉ. प्रेम रावत द्वारा स्थापित द प्रेम रावत फाउंडेशन विश्व के अनेक देशों में शांति शिक्षा और मानवीय सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। संस्था द्वारा अफ्रीकी महाद्वीप के घाना और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन सहित विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने और उन्हें सकारात्मक जीवन दृष्टि देने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

महोत्सव में उनकी चर्चित पुस्तक "स्वयं की आवाज" (Hear Yourself) का भी उल्लेख किया गया, जो वर्ष 2021 में प्रकाशित हुई और न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्ट सेलर सूची में स्थान प्राप्त कर चुकी है। यह पुस्तक विश्वभर में विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित हुई है, जिसमें डॉ. प्रेम रावत ने मनुष्य को अपने भीतर की शांति से जुड़ने और मानसिक शोर से ध्यान हटाकर आत्मचेतना की ओर अग्रसर होने का संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में इसके हिंदी संस्करण का विमोचन भी किया गया, जिसे पाठकों द्वारा अत्यंत सराहना मिली।
अपने संदेश में डॉ. प्रेम रावत ने कहा कि मनुष्य जिस शांति और संतोष की तलाश करता है, वह कहीं बाहर नहीं, बल्कि उसके अपने भीतर ही विद्यमान है। उन्होंने कहा, “जिस चीज की तुमको तलाश है, वह तुम्हारे अंदर है। इसे सुनना आसान है, परंतु इसे अनुभव करना जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।” उन्होंने मधुमक्खी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार मधुमक्खी फूलों से रस निकालने की विधि जानती है, उसी प्रकार यदि मनुष्य जीवन का सही ज्ञान प्राप्त कर ले, तो वह अपने जीवन के वास्तविक आनंद और सार का अनुभव कर सकता है।

उन्होंने संत कबीर दास के प्रसिद्ध दोहों का उल्लेख करते हुए कहा—
“घट-घट मोरा सैयां, सूनी सेज न कोय,
कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।”

इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने बताया कि परम सत्य प्रत्येक व्यक्ति के भीतर विद्यमान है और जब तक मनुष्य का ध्यान उस अविनाशी तत्व की ओर नहीं जाएगा, तब तक उसे वास्तविक शांति प्राप्त नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य जीवन की उस विधि को सीख लेता है, जो उसे अपने भीतर के अमृत से जोड़ती है, तब वह जीवन को केवल व्यतीत नहीं करता, बल्कि उसका वास्तविक आनंद भी अनुभव करता है।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि डॉ. प्रेम रावत पिछले पांच दशकों से विश्वभर में शांति और आत्मबोध का संदेश दे रहे हैं। दिसंबर 2023 तक 5632 से अधिक शांति संदेश कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए उन्हें मलेशिया के प्रतिष्ठित बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उनके शांति संदेश को सुनने के लिए विश्वभर में लाखों लोग विभिन्न कार्यक्रमों, रेडियो, टीवी, कॉन्फ्रेंस और लाइव इवेंट के माध्यम से जुड़ते हैं।

महोत्सव में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि डॉ. प्रेम रावत का संदेश उनके जीवन के लिए प्रेरणादायी है और इससे उन्हें आंतरिक शांति, सकारात्मकता और जीवन को समझने की नई दिशा मिली है। उन्होंने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया कि उन्हें इस महोत्सव के माध्यम से ऐसा दिव्य और प्रेरक संदेश सुनने का अवसर प्राप्त हुआ।
शांति, सद्भाव और आत्मचेतना के संदेश के साथ महोत्सव का समापन हुआ। पूरे आयोजन के दौरान गांव में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और उपस्थित लोगों ने शांति, प्रेम और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया

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Laxmi Kant Pathak Senior Journalist | State Secretary, U.P. Working Journalists Union (Regd.)