ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद बॉर्डर पर लौटी रौनक, लेकिन सतर्कता बरकरार
जम्मू (आरएनआई) आरएस पुरा सेक्टर से सटे सीमावर्ती गांव अब्दुलियां में एक बार फिर सामान्य जिंदगी की तस्वीर दिखने लगी है। ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद गांव के लोग अपने रोजमर्रा के कामों—खेती-बाड़ी, पशुपालन और छोटे कारोबार—में लौट आए हैं। हालांकि, सरहद के नजदीक होने के कारण यहां के लोगों में सतर्कता आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है।
सुबह के समय गांव के चौक पर लोगों की आवाजाही, खेतों में काम करते किसान और खुली दुकानों की रौनक यह संकेत देती है कि हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं। लेकिन बातचीत करने पर साफ झलकता है कि यहां के लोगों ने हालात से सबक लिया है और किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
स्थानीय युवक पवन कुमार और सोनू चौधरी बताते हैं कि फिलहाल स्थिति शांत है, लेकिन गांव की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत करने की जरूरत है। गांव तीन तरफ से सीमा से घिरा हुआ है, ऐसे में यहां बने बंकरों की संख्या बढ़ाने की मांग भी उठ रही है। अभी गांव में नौ छोटे और तीन बड़े बंकर मौजूद हैं, जिन्हें जरूरत के हिसाब से अपर्याप्त माना जा रहा है।
जीरो लाइन के पास हालात सामान्य नजर आते हैं, जहां फेंसिंग के आसपास ग्रामीण अपने मवेशी चरा रहे हैं। पूर्व सैनिक केर सिंह का कहना है कि सीमापार से खतरा कभी भी पैदा हो सकता है, लेकिन भारतीय सेना पूरी तरह सक्षम और हर स्थिति के लिए तैयार है। इसी भरोसे के साथ ग्रामीण अपने कामकाज में जुटे हुए हैं।
सीमा क्षेत्र में अब बाहरी लोगों की आवाजाही भी बढ़ने लगी है। कई लोग बॉर्डर का माहौल देखने पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय दुकानों—खासतौर पर मिल्क केक की दुकानों—पर भी रौनक लौट आई है। स्थानीय निवासी सुरेंद्र सिंह, जो विदेश में रहते हैं, बताते हैं कि यहां आकर सामान्य जीवन देखकर उन्हें गर्व और संतोष महसूस होता है।
एक साल बाद यह साफ दिख रहा है कि जहां एक ओर जीवन पटरी पर लौट आया है, वहीं दूसरी ओर सतर्कता और सुरक्षा तैयारियां आज भी गांव की जिंदगी का अहम हिस्सा बनी हुई हैं।
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