माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी पर गंभीर सवाल, UPCA पर तत्काल कार्रवाई की मांग
लखनऊ (आरएनआई) उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) के विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों और "उत्तर प्रदेश" नाम के कथित दुरुपयोग के संबंध में, माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में देरी को लेकर एक स्मरण-पत्र जारी किया गया है। याचिकाकर्ता उपेंद्र यादव ने खेल विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव महोदय को यह पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
8 सप्ताह की समय सीमा हुई पार, कार्रवाई शून्य
पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की लखनऊ पीठ ने 19 अगस्त 2025 को याचिका संख्या WRIT - C № - 7825 of 2025 पर एक स्पष्ट आदेश दिया था। इस आदेश के तहत, खेल विभाग को याचिकाकर्ता की शिकायत पर आठ (8) सप्ताह के भीतर सम्मन जारी करने और उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि, यह खेदजनक है कि यह निर्धारित 8-सप्ताह की समय सीमा व्यतीत हो चुकी है, लेकिन विभाग की ओर से कोई संतोषजनक कार्रवाई या प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। इस निष्क्रियता को न केवल न्यायालय के आदेश की अवहेलना माना जा रहा है, बल्कि यह यूपीसीए जैसी संस्था द्वारा की जा रही अवैध गतिविधियों को परोक्ष रूप से बढ़ावा देने जैसा भी है।
देरी से बढ़ रहे गंभीर जोखिम
याचिकाकर्ता उपेंद्र यादव ने इस विलंब के कारण उत्पन्न हो रहे गंभीर जोखिमों को रेखांकित किया है: हितों के टकराव (Conflict of Interest) को बढ़ावा: यूपीसीए द्वारा अनधिकृत रूप से "उत्तर प्रदेश" नाम का उपयोग जारी है, जिससे जनता और हितधारकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
कानून का निरंतर उल्लंघन: यूपीसीए के विरुद्ध कानपुर की माननीय अदालतों में पहले से ही 13 आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें वित्तीय अनियमितताएं और गबन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। विभाग की निष्क्रियता इन अवैध संचालनों को सहयोग प्रदान कर रही है।
कानूनी बाध्यता का सवाल
यादव ने प्रमुख सचिव से तत्काल और ठोस कार्रवाई की अपेक्षा करते हुए निवेदन किया है कि न्यायालय के आदेश का अनुपालन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक कानूनी बाध्यता है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि विभाग की ओर से कोई भी और देरी, एक अवैध संस्था को वैधता प्रदान करने और राज्य के नाम के दुरुपयोग को जारी रखने का कारण बनेगी, जिसके गंभीर परिणाम होंगे।
इस महत्वपूर्ण मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए, उत्तर प्रदेश के खेल हित में निर्णय लेने के अनुरोध के साथ, पत्र की प्रतिलिपि माननीय मुख्यमंत्री महोदय, सचिव, कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय, भारत सरकार, और माननीय सहकारिता मंत्री श्री जे.पी.एस. राठौर जी को भी अग्रसारित की गई है।
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