ब्रजेश पाठक बोले—आशा बहुअन का मातृत्व अवकाश भी दई रहेन, सपा से दोगुना मानदेय भी
लखनऊ (आरएनआई)। उत्तर प्रदेश विधानमंडल में आज से वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा की शुरुआत हो गई। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सबसे पहले विधायकों को बजट पर अपने विचार रखने का अवसर दिया।
चर्चा के दौरान सपा विधायक अतुल प्रधान ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि न सरकारी अस्पतालों में दवाएं उपलब्ध हैं और न ही जांच की समुचित व्यवस्था। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह गर्भवती महिलाओं को अस्पताल की फर्श पर ही प्रसव कराना पड़ता है, जिस कारण मरीज मजबूरी में निजी अस्पतालों की ओर रुख करते हैं। अतुल प्रधान ने यह भी पूछा कि क्या निजी अस्पतालों की शिकायतों पर कभी ठोस कार्रवाई की गई है।
इसके जवाब में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश में बिना किसी जाति या धर्म के भेदभाव के पर्यटन का विकास कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 12 पर्यटन सर्किट विकसित किए जा रहे हैं और सभी परियोजनाएं समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरी की जा रही हैं।
पर्यटन को लेकर सपा विधायकों ने आगे सवाल किया कि क्या सरकार सभी धर्मों से जुड़े पर्यटन स्थलों को समान रूप से बढ़ावा देने के लिए धनराशि उपलब्ध कराएगी। उनका कहना था कि यदि प्रदेश में पर्यटन सुविधाएं बढ़ेंगी तो रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि अब तक कौन-कौन से ऐसे स्थल विकसित किए गए हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित कर सकें।
इस बीच स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने आशा कार्यकर्ताओं को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार सपा शासनकाल की तुलना में आशा बहुओं को दोगुना मानदेय दे रही है। सपा सरकार के समय जहां एक हजार रुपये मिलते थे, वहीं अब दो हजार रुपये दिए जा रहे हैं। ब्रजेश पाठक ने यह भी कहा कि आशा बहुओं को अब मातृत्व अवकाश की सुविधा दी जा रही है और जब वे गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लेकर जाती हैं, तो उनके ठहरने की व्यवस्था भी सीएचसी में की गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगे भी आशा बहुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर सरकार ध्यान देगी।
अगली कड़ी में विधायक राकेश वर्मा ने सरकार पर आशा बहनों के जीवन में निराशा फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आशा बहुओं से टीबी, कुष्ठ निवारण और कुपोषण जैसे अहम अभियानों का काम लिया जाता है, लेकिन उन्हें अब तक राज्य कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। उनका कहना था कि मानदेय न बढ़ाया जाना समान काम, समान वेतन के सिद्धांत का उल्लंघन है।
वहीं, सदन में विधायक रागिनी सोनकर ने आंगनबाड़ी के माध्यम से बच्चों को दिए जा रहे पुष्टाहार की गुणवत्ता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा महंगाई में 66 रुपये में 600 कैलोरी का पौष्टिक आहार देना कैसे संभव है। इस पर मंत्री बेबी रानी मौर्य ने लिखित जवाब देने का आश्वासन दिया।
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