जल संवर्धन अभियान में सफाई से उपेक्षित भुजरियां तालाब, नालों सहित गुनिया में बनें मकान डूबेंगे? क्या प्रशासन लेगा होने वाली जन धन हानि की जिम्मेदारी!
गुना (आरएनआई) शहर और आसपास काटी गई अनेक अवैध कॉलोनियों के मामलों में दोषियों पर अभी तक प्रशासन कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर सका है। जबकि क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी कलेक्ट्रेट में हुई प्रशासनिक अधिकारियों सहित जिले के जनप्रतिनिधियों की बैठक में स्पष्ट रूप से कहा था कि भूमाफिया,राशन माफिया,नशा माफिया सहित अपराध और सरकारी जमीनों पर कब्जा नहीं होने देंगे, कलेक्टर ओर पुलिस अधीक्षक इनको जिले से बाहर करेंगे। इसमें कोई भी राजनीतिक दखल नहीं होगा,अगर मेरे साथ रहने वाले लोग या चाहे मेरे परिवार के लोग भी ऐसा कृत्य करते तो आप कार्यवाही करे। में नहीं रोकूंगा।
इसके बाद पूर्व कलेक्टर ने कुछ कॉलोनाइजरों पर एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन वह भी राजनीतिक दखल से नूरा कुश्ती जैसा मामला साबित हुई। कुछ प्रकरण बने आरोपी बनाए गए, कमी छोड़ी गई जिसका फायदा उठाकर कॉलोनाइजर हाईकोर्ट से स्टे ले आए फिर इसके बाद कार्यवाही ठंडे बस्ते में चली गई।
गुना में जो कॉलोनी कथित तौर पर वैध हैं यानी जिनके नक्शे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अप्रूव कराए गए हैं और विकास अनुज्ञा मिलने के बाद जिनमें प्लॉटिंग की गई है यदि उनके अनुमति संबंधी कागजी शर्तों और स्वीकृत नक्शे की जमीन में डेवलपमेंट का ही यदि धरातल पर जाकर भौतिक सत्यापन या मिलान करा लिया जाए तो वैध की आड़ में अवैध कॉलोनी कैसे काटी गईं ये आसानी से समझा जा सकता है।
सुविग सूत्रो अनुसार टी एंड सीपी से सर्वे नंबर 181, 182, 187/1 में कॉलोनी काटने की परमिशन ली गई और उससे सटे सर्वे नंबरों में 188, 185/14 में भी प्लॉट बेच दिए गए और सर्वे नंबर 188 में मुख्य रास्ता खोल दिया गया। स्वीकृत नक्शे में सरकारी सर्वे नंबर 186 को पार्क के बीचोंबीच इस तरह ले लिया गया कि कल को यदि उसने शासन कोई भवन बनाए तो पार्क अनुपयोगी हो जाए। इस तरह के नक्शे स्वीकृत किए जाना भी संदेहास्पद है। हाथ बचाने के लिए सरकारी सर्वे नंबर जो कॉलोनी के अंदर आ रहा है उसे लाल स्याही से चिन्हित कर दिया गया। ऐसे कई मामले हैं जिनकी बारीकी से पड़ताल की जाए तो एक बड़ा रैकेट सामने आएगा। कॉलोनाइजरों ने कथित वैध कॉलोनियों में शासन द्वारा तय की गई शर्तों का आज तक पालन नहीं किया है। जबकि एक भी शर्त का उल्लंघन करने पर अनुमति स्वत: निरस्त हो जाती है। लेकिन आज तक किसी की नहीं हुई।
इस बीच कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल की ओर से गुना जिले में प्लाट संपत्ति खरीदने वालों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है कि जिस स्थान अथवा कॉलोनी में प्लाट खरीद रहे हों, तो पहले उसकी जांच पड़ताल कर लें। अवैध कालोनियों में प्लाट खरीदने से बचें, इसके साथ ही उन्होंने कॉलोनाइजरों को निर्देश दिये हैं कि अपनी-अपनी कॉलोनी साइड पर बोर्ड लगाकर उस पर जानकारी प्रदर्शित की जायें। इस जानकारी में कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रेशन, टीएनसीपी की मंजूरी का क्रमांक, डायर्वसन तथा भूमि जिससे खरीदी गई है, उसका रजिस्ट्री क्रमांक, नाम आदि जानकारी अंकित करना होगी।
कलेक्टर ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान अथवा कॉलोनी में प्लाट खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर ले कि कॉलोनाईजर का रजिस्ट्रेशन है, भूमि *डायर्वटेड है, *टीएनसीपी तथा अन्य प्रशासनिक स्वीकृतियां है। संपूर्ण जानकारी करने तथा वैद्य तरीके से कॉलोनी काटी गई हो, उसी में प्लाट खरीदें। इसके साथ ही भवन की स्वीकृति लेकर ही भवन निर्माण करायें। उन्होंने कहा कि अवैध कॉलोनियों में प्लाट लेने से न तो लोन की सुविधा मिल पाती है और न ही बिजली, पानी, सड़क आदि बुनियादी सुविधाएं। कई बार प्लाट का कब्जा भी नही मिल पाता है, इसलिए नागरिक प्लाट खरीदते समय सर्तकता बरतें तथा जांच परख करने के बाद ही प्लाट खरीदें।
यहां बता दे कि कलेक्टर ने सभी एसडीएम को निर्देश दिये है कि अपने-अपने क्षेत्र में जहां भी कॉलोनियां विकसित की जा रही है, उन कॉलोनाईजर्स से जमीन के संबंध में संपूर्ण जानकारी प्रदर्शित करते हुए सूचना पटल लगवाये जायें तथा अवैध कॉलोनी काटने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाये।
लेकिन इसके बाद भी भुजरिया तालाब,नालों सहित गुनिया नदी,पनारिया नदी को पूर कर भवन ओर कॉलोनी काटी जा रही हैं। कॉलोनाइजरों का लोगो से कहना रहता हैं कि हमारा कुछ नहीं होना,हम आपकी रजिस्ट्री ओर नामांतरण तक करवा देंगे। प्रशासन में जिम्मेदार sdm ओर तहसीलदार एवं आर आई तक सब सेट हैं। क्या प्रशासन के मुखिया जिनके पास तमाम सिस्टम के अधिकृत पावर हैं क्या वो भुजरियां तालाब,गुनिया नदी,पनारिया नदी,नालों पर कब्जे करके शासकीय भूमि को ही दीमक बन कर चट कर रहे हैं क्या उन पर बगैर राजनीतिक दवाब के केंद्रीय मंत्री के दिए निर्देश पर सख्त होंगे या फिर ??
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