छतरपुर में लोक निर्माण विभाग के 196 बंगलों की तलाश — कागज़ों में दर्ज, लेकिन ज़मीन पर गायब!
छतरपुर (आरएनआई) सरकार की बहुमूल्य संपत्ति को दस्तावेज़ों में हेराफेरी कर यदि बेच दिया गया है तो यह सवाल उठता है कि आखिर किस अधिकारी के इशारे पर यह खेल खेला गया? इस पूरे मामले की जांच बेहद ज़रूरी है।
क्या अरबों की इस सरकारी संपत्ति को कब्जे से मुक्त कराया जा सकेगा?
2018 में सीएम हेल्पलाइन की शिकायत क्रमांक 5579538 के जवाब में मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग सागर परिक्षेत्र ने पत्र क्रमांक 213 दिनांक 17 अप्रैल 2018 के माध्यम से कार्यपालन यंत्री, छतरपुर को निर्देश दिए थे कि यदि लोक निर्माण विभाग की यह संपत्ति नगर पालिका क्षेत्र में आती हो तो उसे नगरपालिका के अधिपत्य में दिए जाने हेतु कलेक्टर, जिला छतरपुर से संपर्क कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि हो रहे अतिक्रमण को रोका जा सके।
लेकिन इस पत्र को दबा दिया गया, क्योंकि विभाग के भीतर सक्रिय लाभार्थी गिरोह नहीं चाहता था कि यह संपत्ति नगरपालिका को सौंपी जाए। यदि विभाग की मिलीभगत न होती, तो आज लोक निर्माण विभाग के 196 बंगले और उनकी जमीन नगरपालिका छतरपुर के अधीन होती। इससे न केवल शहर की पार्किंग समस्या का स्थायी समाधान हो सकता था, बल्कि नगरपालिका की आय में भी काफी बढ़ोतरी होती।
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