अंध मूक प्रशासन : नानाखेड़ी मंडी तिराहे की तस्वीरें बोलती हैं
गुना (आरएनआई) शहर के नानाखेड़ी मंडी तिराहे पर प्रशासनिक लापरवाही और अतिक्रमण की अनदेखी का जीता-जागता उदाहरण देखने को मिल रहा है। एबी रोड पर स्थित इस तिराहे पर एक गुमटी वर्षों से वहीं लगी है — चाहे आसपास का दृश्य बदल गया हो, लेकिन गुमटी अपनी जगह टस से मस नहीं हुई।
पहले जब मंडी गेट सड़क के बीचोंबीच था, तब यह गुमटी गेट के दाहिने पिलर की ओट में लगाई जाती थी। इसके बाद जब प्रशासन ने गेट को हटाने की कार्यवाही शुरू की, तब भी गुमटी वहीं बनी रही। यहां तक कि जब पोकलेन मशीन से गेट के दोनों पिलर गिराए गए, तब भी गुमटी अपनी जगह से नहीं हिली, और बिक्री उसी तरह जारी रही। आज गेट का कोई नामोनिशान नहीं बचा है, लेकिन गुमटी आज भी उसी स्थान पर लगती है—जैसे समय थम गया हो।
यह दृश्य प्रशासन की "अंध मूक" भूमिका को उजागर करता है। सवाल यह उठता है कि जब सड़क पर बार-बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है, तो फिर यह गुमटी कैसे हर बार बच निकलती है? क्या यह केवल एक गरीब रेहड़ीवाले का साहस है या इसके पीछे बड़े दुकानदारों की शह? स्थानीय लोग बताते हैं कि सड़क किनारे की आधी दुकानें और ठेले उन्हीं प्रभावशाली लोगों की हैं, जो प्रशासन के लिए "अदृश्य" बने हुए हैं।
गुमटी चालक की जिद अपने आप में "इच्छाशक्ति" का प्रतीक है—कुछ भी हो जाए, वह वहीं दुकान लगाएगा। लेकिन यही इच्छाशक्ति प्रशासन में क्यों नहीं दिखती, जो इन अतिक्रमणों को स्थायी रूप से हटाने में नाकाम है?
विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बात यह है कि चौथे चित्र में गुमटी सड़क के बीचोंबीच दिखाई देती है, जबकि वस्तुतः वह वहीं है जहां कभी मंडी गेट हुआ करता था। यदि गेट न हटाया गया होता, तो यह गुमटी आज भी “सही जगह” पर मानी जाती। अब जबकि गेट हट चुका है, वही स्थान अब मुख्य सड़क का हिस्सा बन गया है।
प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि ऐसे अतिक्रमण न केवल यातायात में बाधा उत्पन्न करते हैं, बल्कि किसी दिन दुर्घटना का बड़ा कारण भी बन सकते हैं। भगवान से यही प्रार्थना है कि यह गुमटी कभी किसी हादसे का कारण या शिकार न बने — लेकिन अगर ऐसा हुआ, तो दोष सिर्फ उस दुकानदार का नहीं, बल्कि उस "अंध मूक प्रशासन" का भी होगा, जो सब कुछ देखकर भी चुप है।
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