ईमानदार डिप्टी एसपी कृष्ण प्रताप सिंह की फर्जी मुठभेड़ में हत्या, पत्नी और बेटियों ने लड़ी लंबी लड़ाई, हत्यारों को 26 साल बाद सजा

Oct 3, 2025 - 19:33
Oct 3, 2025 - 19:35
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ईमानदार डिप्टी एसपी कृष्ण प्रताप सिंह की फर्जी मुठभेड़ में हत्या, पत्नी और बेटियों ने लड़ी लंबी लड़ाई, हत्यारों को 26 साल बाद सजा

उत्तर प्रदेश (आरएनआई) उत्तर प्रदेश में दशकों से यह होता रहा है कि यदि आप अब किसी को निपटाना चाहते हो तो किसी अपराधी को सुपारी देने के बजाय उत्तर प्रदेश पुलिस को सुपारी दे दो, उत्तर प्रदेश पुलिस उसे फर्जी मुठभेड़ के बहाने या किसी न किसी बहाने सरकारी हत्या करके उसे निपटा देगी। 

आप यह जानकर आश्चर्य में पड़ जाएंगे 1982 में उत्तर प्रदेश के गोंडा में एक थाने की पूरी पुलिस टीम जिसमें एक इंस्पेक्टर तीन सब इंस्पेक्टर और 8 कांस्टेबल थे उन्होंने अपने ही इलाके के बेहद ईमानदार डिप्टी एसपी के पी सिंह यानी कृष्ण प्रताप सिंह की हत्या की सुपारी ली थी और एक फर्जी मुठभेड़ में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने ही डिप्टी एसपी को मार डाला था। 

 वह तो उस डिप्टी एसपी कृष्ण प्रताप सिंह की पत्नी विभा सिंह जो खुद पीसीएस अधिकारी थी और उन्होंने जोरदार केस लड़ा उसके बाद सीबीआई जांच हुई इसमें 3 पुलिस वालों को फांसी की सजा हुई 7 पुलिस वालों को आजीवन कारावास की सजा हुई। 

ईमानदार DSP कृष्ण प्रताप सिंह की जब हत्या पुलिस वालों ने किया था तब उनकी दो बेटियां थी और दोनों बेटियां एकदम अबोध थी कुछ ही महीने की थी। 

 जब वह बड़ी हुई तो उनकी मां ने उनसे कहा कि तुम्हारे पिताजी का सपना था कि मेरी दोनों बेटियां आईएएस बने और उन दोनों बेटियों किंजल सिंह और प्रांजल सिंह ने अपने पिता को इंसाफ दिलाने के लिए मुकदमा लड़ने के साथ-साथ अपने पिता के सपने को भी पूरा किया और दोनों बेटियों ने सिविल सर्विस पास करके आईएएस अधिकारी बनी। जबकि दोनों बेटियों सीबीआई की स्पेशल कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़ा और अंत में अपने पिता को न्याय दिलवाया यह पूरी घटना इस प्रकार से है। 

1982 में एक बेहद ईमानदार और कर्मठ पुलिस अधिकारी कृष्ण प्रताप सिंह गोंडा में पोस्टेड थे उनके महकमे के कुछ पुलिस अधिकारी उनसे इसलिए नाराज चल रहे थे कि वह बेहद ईमानदार थे  और दूसरे तमाम अपराधी भी के पी सिंह से डरते थे और केपी सिंह की वजह से वह अपराध को अंजाम नहीं दे पा रहे थे। 

 फिर कुछ अपराधियों  ने पुलिस इंस्पेक्टर आरबी सरोज को डिप्टी एसपी के पी सिंह की हत्या की सुपारी दे दिया, आरबी सरोज खुद के पी सिंह से नाराज था क्योंकि वह लूट खसोट  नहीं कर पा रहा था। उसके बाद अरबी सरोज ने डिप्टी एसपी को मारने की पूरी प्लानिंग बनाई और डिप्टी एसपी को रात में वायरलेस  पर यह मैसेज भेजा कि एक गांव में इलाके के जाने-माने डकैत राम बलवान और अर्जुन पासी का डकैतों  का गैंग डाका डालने के लिए आ गया है और वो गोलीबारी कर रहे हैं। 

ईमानदार डिप्टी एसपी रात में ही उस गांव में पहुंचे वहां इंस्पेक्टर RB  सरोज पहले से मौजूद था उसने उन दोनों अपराधियों को पहले से मारकर वहां रखा था और फिर जैसे ही डिप्टी एसपी के पी सिंह वहां पहुंचे इंस्पेक्टर RB सरोज ने उनकी भी गोली मारकर हत्या कर दी और यह कहानी प्रसारित कर दिया गया डकैतों की मुठभेड़ में डिप्टी एसपी को गोली लगी और वह शहीद हो गए और पुलिस टीम ने दोनों डकैतों को गोली मार दिया। 

मीडिया में इंस्पेक्टर आरबी सरोज की खूब वाहवाही हुई लेकिन गांव वालों के कुछ बयान से डिप्टी एसपी के पी सिंह की पत्नी विभा सिंह जो खुद प्रशासनिक अधिकारी थी उनको शक हुआ और उन्होंने अपने स्तर से इस मामले की छानबीन किया तब उन्हें पूरी साजिश पता चला उसके बाद अपने शहीद पति जो अपने ही महकमे के भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों द्वारा मारे गए थे उनको न्याय दिलाने के लिए उन्होंने  लंबी लड़ाई छिड़ी दबाव में यूपी सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए जांच में पूरी कहानी खुल गई।  ना सिर्फ सीबीआई की स्पेशल कोर्ट बल्कि हाईकोर्ट और फिर 31 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस में अंतिम निर्णय सुनाया जिसमें इंस्पेक्टर आरबी सरोज सब इंस्पेक्टर राम नायक पांडे सब इंस्पेक्टर रामकरण सिंह यादव को फांसी की सजा और सब इंस्पेक्टर नसीम अहमद  हवलदार रमाकांत दीक्षित हवलदार मंगला सिंह हवलदार परवेज हुसैन और कांस्टेबल राजेंद्र प्रसाद सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 

सभी हत्यारे पुलिस अधिकारी आज लगातार 26 साल तिहाड़ जेल में बंद है और तीन अपनी फांसी की सजा का इंतजार कर रहे हैं उनकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है। 

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