शिक्षक को आत्महत्या के लिए विवश करने वाले शिक्षक अधिकारियों को 7-7 वर्ष का कठोर कारावास

सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्र ने आत्महत्या करने वाले शिक्षक को प्रताड़ित करने वाले शिक्षक अधिकारियों को 7-7 वर्ष के कठोर कारावास और ₹15-15 हजार के अर्थदण्ड से दण्डित किया।

Dec 24, 2025 - 21:39
Dec 24, 2025 - 21:43
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गुना (आरएनआई) प्रकरण में मध्यप्रदेश राज्य की ओर से पैरवी लोक अभियोजक अलंकार वशिष्ठ ने की।

अभियोजन कहानी के अनुसार मृतक धर्मेन्द्र सोनी शासकीय प्राथमिक विद्यालय गमरिया के टपरे में सहायक शिक्षक के पद पर पदस्थ था। दिनांक 18-4-23 को ग्राम के चौकीदार लक्ष्मीनारायण को सिमरौद के लोगों ने फोन करके बताया कि शासकीय स्कूल के शिक्षक ने फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है, तब चौकीदार ने मौके पर पहुंच कर देखा कि स्कूल के एक कमरे में शिक्षक धर्मेन्द्र सोनी पिता काशीराम सोनी निवासी कर्नल गंज गुना ने स्कूल के कमरे की छत के कुंदे में रस्सी डालकर गले में रस्सी का फंदा लगाकर फांसी लगा ली है। चौकीदार ने बमौरी थाने में उक्त घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच में साक्षीगण और मृतक के परिवार वालों के कथन लिए तब मृतक के माता-पिता ने बताया कि बमौरी बीईओ राजीव यादव और सीएसी छतरसिंह लोधा लम्बे समय से धर्मेन्द्र को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान कर रहे थे एवं इन दोनों ने धर्मेन्द्र को इतनी मानसिक प्रताड़ना दी कि धर्मेन्द्र ने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने घटना स्थल से मृतक का सुसाइड नोट जप्त किया। विवेचना की समस्त कार्यवाहियां पूर्ण कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। घटना वाले दिन मृतक मीटिंग की कहकर सुबह घर से निकला था। मृतक की पत्नी को दोपहर लगभग 4:30 बजे किसी ने फोन करके मृतक की तबियत खराब होने की बात कही थी, तब मृतक के पिता, भाई और पड़ोसी घटना स्थल पर पहुंचे थे, जहां धर्मेन्द्र उन्हें मृत अवस्था में मिला था। मृतक के स्कूल में ताला लगाकर फोटो खींचकर और मध्यान्ह भोजन खराब बताकर मृतक से आरोपीगण ₹ 500/- से लेकर ₹ 5000/- तक मांगते थे। आरोपीगण की ओर से गुना जिले के पूर्व डीईओ चन्द्र शेखर सिसौदिया, बीआरसीसी कोकसिंह पोरसिया और विधि सलाहकार अतुल शर्मा ने बचाव साक्षी के रूप में न्यायालय में कथन दिए। मृतक ने सुसाइड नोट में लिखा है कि स्कूल खुला होने पर भी चैनल गेट को बन्द करके उसके फोटो मृतक को भेजकर उससे एक हजार से पांच हजार रुपए तक मांगे जाते थे और मृतक ने अनेक बार आरोपी गण को उक्त राशि दी भी है।  

अभियाेजन एवं बचाव पक्ष की सम्पूर्ण साक्ष्य और तर्कों के पश्चात् न्यायालय ने माना कि निरीक्षण की आड़ में अवैध राशि की वसूली के कृत्य के कारण ही धर्मेन्द्र ने आत्महत्या की है। सत्य मृत व्यक्ति के होंठों पर विराजमान रहता है।

 न्यायालय ने समस्त साक्षियों के कथन, सम्पूर्ण साक्ष्य और अभियोजन पक्ष तथा बचाव पक्ष के समस्त तर्कों को सुनने के पश्चात् आरोपीगण छतर सिंह लोधा पिता मदन लाल निवासी ग्राम सिलावटी, थाना बमौरी और राजीव यादव पिता हरिजन सिंह यादव ग्राम मलौआ तहसील भांडेर जिला दतिया को मृतक धर्मेन्द्र की मृत्यु के लिए दोषी ठहराते हुए और आरोपीगण को दया का हकदार न मानते हुए *भा.द. विधि की धारा 306/34 में 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹ 15-15000/-* के अर्थदण्ड से दण्डित किया। न्यायालय ने अर्थदण्ड की सम्पूर्ण राशि ₹ 30,000/- मृतक की पत्नी को दिलाए जाने का भी आदेश पारित किया।

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