अशोकनगर में एम्बुलेंस नहीं मिलने पर हंगामा: 15 वर्षीय बच्ची के शव को परिजनों ने कंधे पर ले जाया, सरकार पर उठे सवाल
अशोकनगर से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एम्बुलेंस सुविधा न मिलने के कारण एक 15 वर्षीय आदिवासी बच्ची के शव को परिजनों को हाथों में उठाकर अस्पताल से घर ले जाना पड़ा। इस घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा जा रहा है कि जहां एक ओर डॉ. मोहन यादव की सरकार हवाई एम्बुलेंस जैसी योजनाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीन पर बेसिक एम्बुलेंस तक समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश में करीब 2000 एम्बुलेंस के लिए 900 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं।
हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग तेज हो गई है। यह मामला अब प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर बहस का विषय बनता जा रहा है।
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