भाई दूज आज: जानें तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और पौराणिक कथा

Oct 23, 2025 - 12:26
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भाई दूज आज: जानें तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और पौराणिक कथा

नई दिल्ली (आरएनआई): आज, 23 अक्तूबर 2025, गुरुवार को देशभर में भाई दूज का पावन पर्व बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का अंतिम दिन भी होता है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगलकामना करती हैं। वहीं, भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति प्रेम और आशीर्वाद व्यक्त करते हैं।

भाई दूज का शुभ मुहूर्त 2025
पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 22 अक्तूबर, बुधवार की रात 8:17 बजे से प्रारंभ होकर 23 अक्तूबर की रात 10:47 बजे तक रहेगी।
हिंदू धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए भाई दूज का पर्व आज 23 अक्तूबर को ही मनाया जाएगा।

शुभ चौघड़िया मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 2:54 बजे तक

अमृत चौघड़िया मुहूर्त: दोपहर 1:30 से 2:54 बजे तक

शास्त्रों के अनुसार, इसी समय तिलक एवं पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

भाई दूज 2025 पूजा विधि

शुभ मुहूर्त में पूजा आरंभ करें।

भाई को पूर्व दिशा की ओर और बहन को पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठाएं।

भाई को पवित्र आसन पर बैठाकर रोली, चावल और दीप से तिलक करें।

छोटे भाई को अंगूठे से और बड़े भाई को अनामिका अंगुली से तिलक लगाएं।

तिलक दीपशिखा के आकार में लगाना शुभ माना गया है।

तिलक के बाद नारियल और गंगाजल भाई की गोद में रखें।

भाई को अपने हाथों से भोजन या मिठाई खिलाएं।

पूजा के बाद भाई बहन को वस्त्र या उपहार भेंट करें।

यह परंपरा भाई की दीर्घायु और समृद्धि के लिए की जाती है।

भाई दूज की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान सूर्यदेव और छाया के दो संतानें थीं—यमराज और यमुना। यमुना अपने भाई यमराज से अत्यंत स्नेह करती थीं और चाहती थीं कि वे उनके घर आएं और उनके हाथों का भोजन ग्रहण करें।

एक दिन, कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अचानक यमुना के घर पहुँचे। यमुना ने उनका स्वागत किया, तिलक किया और प्रेमपूर्वक भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वर मांगा कि जो बहन इस दिन अपने भाई को तिलक लगाकर प्रेम से भोजन कराएगी, उसका भाई दीर्घायु होगा और उसे यमलोक का भय नहीं रहेगा।

तब से यह परंपरा हर वर्ष भाई दूज के रूप में मनाई जाती है।

भाई दूज की थाली में रखें ये वस्तुएं

रोली और चावल

दीपक

मिठाई

कलावा (मौली)

फूल

पान का पत्ता और सुपारी

नारियल और गंगाजल

भाई दूज का मंत्र
“गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को।
सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे,
मेरे भाई आप बढ़ें, फूले-फलें।”

इस प्रकार भाई दूज न केवल भाई-बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है, बल्कि यह पारिवारिक एकता, प्रेम और विश्वास का प्रतीक भी है। आज का दिन रिश्तों में नई ऊष्मा और आत्मीयता का संदेश लेकर आता है।

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