कुछ घंटों बाद शुरू होगा चंद्र ग्रहण, जानें समय और किन बातों का रखें ध्यान
नई दिल्ली (आरएनआई)। 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जो भारत में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। इसके अलावा यह खगोलीय घटना एशिया, ऑस्ट्रेलिया, पैसिफिक द्वीपों तथा उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के कई हिस्सों में भी नजर आएगी। भारत में चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि है, जो शाम 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। मघा नक्षत्र सुबह 7 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। सुकर्माण योग प्रातः 10 बजकर 24 मिनट तक है। सूर्योदय सुबह 6 बजकर 37 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 14 मिनट पर होगा। चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा। राहुकाल दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से 4 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
देश के विभिन्न शहरों में चंद्र ग्रहण के दिखाई देने का समय अलग-अलग रहेगा। दिल्ली में यह शाम 6 बजकर 22 मिनट, नोएडा में 6 बजकर 20 मिनट, गुरुग्राम और लखनऊ में 6 बजकर 2 मिनट, कोलकाता में 5 बजकर 43 मिनट, भोपाल और चेन्नई में 6 बजकर 21 मिनट, पटना और प्रयागराज में 5 बजकर 55 मिनट, बेंगलुरु में 6 बजकर 32 मिनट, हैदराबाद में 6 बजकर 26 मिनट, जयपुर में 6 बजकर 14 मिनट पर दिखाई देगा।
वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण पूरी तरह सुरक्षित खगोलीय घटना है। इसे नंगी आंखों से देखना हानिकारक नहीं होता, क्योंकि इसमें सूर्य की किरणें सीधे आंखों पर नहीं पड़तीं। यह सूर्य ग्रहण से अलग है, इसलिए इसे देखने के लिए किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती। बच्चे भी खुले मैदान या बालकनी से सुरक्षित रूप से इसका आनंद ले सकते हैं।
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस दौरान सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती। पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते समय सूर्य की नीली और हरी किरणें बिखर जाती हैं, जबकि लाल और नारंगी तरंगदैर्ध्य चंद्रमा तक पहुंचते हैं। इसी कारण ग्रहण के दौरान चंद्रमा लालिमा लिए दिखाई देता है। इस प्रक्रिया को रेले स्कैटरिंग (Rayleigh Scattering) कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। कई लोग इस अवधि में चावल, गेहूं, दूध, चीनी, घी, वस्त्र या धन का लेन-देन नहीं करते और पूजा-पाठ या मंत्र जाप करते हैं। हालांकि ये मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं और वैज्ञानिक रूप से ग्रहण का दैनिक जीवन पर कोई नकारात्मक प्रभाव सिद्ध नहीं हुआ है।
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