टीपू सुल्तान–शिवाजी महाराज की तुलना पर सियासी बवाल, महाराष्ट्र में गरमाई राजनीति; कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना
मुंबई (आरएनआई)। महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना को लेकर सियासी उफान तेज हो गया है। इस बयान के बाद राज्यभर में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और राजनीतिक बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है। विवाद की शुरुआत महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के बयान से हुई, जिसके बाद अब कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं।
इस पूरे मामले पर महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन सावंत ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा टीपू सुल्तान को लेकर दोहरी राजनीति कर रही है। सावंत ने कहा कि पहले भाजपा नेता टीपू सुल्तान की तारीफ करते रहे हैं, लेकिन अब चुनावी फायदे और वोट हासिल करने के लिए वही लोग उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने इसे समाज को बांटने की राजनीति करार दिया।
सचिन सावंत ने भाजपा के पुराने फैसलों और बयानों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2012 में अकोला नगर निगम में भाजपा नेता विजय अग्रवाल ने एक हॉल का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया था। इसी तरह 2013 में मुंबई के एम-ईस्ट वार्ड में एक सड़क का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने के प्रस्ताव का भाजपा पार्षदों ने समर्थन किया था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2001 में अंधेरी वेस्ट में टीपू सुल्तान मार्ग नामकरण के प्रस्ताव में तत्कालीन सांसद गोपाल शेट्टी और भाजपा पार्षद शामिल थे।
कांग्रेस नेता ने आगे दावा किया कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने टीपू सुल्तान की मजार पर जाकर विजिटर्स बुक में उनकी प्रशंसा की थी। साथ ही उन्होंने 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कर्नाटक विधानसभा में दिए भाषण का उल्लेख किया, जिसमें टीपू सुल्तान की सराहना की गई थी। सावंत ने यह भी कहा कि इतिहास में ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि टीपू सुल्तान भगवान राम के नाम वाली अंगूठी पहनते थे।
भाजपा की ओर से इस विवाद पर कड़ा रुख अपनाया गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना को पूरी तरह गलत बताया और कहा कि कांग्रेस नेताओं को इस तरह की तुलना पर शर्म आनी चाहिए। उनका कहना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज महाराष्ट्र और देश के स्वाभिमान के प्रतीक हैं, उनकी तुलना किसी भी अन्य ऐतिहासिक पात्र से नहीं की जा सकती।
विवाद की जड़ में हर्षवर्धन सपकाल का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिस तरह छत्रपति शिवाजी महाराज ने विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष किया, उसी तरह टीपू सुल्तान ने भी अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी थी। इसी तुलना को लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया। टीपू सुल्तान को लेकर इतिहास में पहले से ही अलग-अलग मत रहे हैं—कुछ उन्हें वीर स्वतंत्रता सेनानी मानते हैं, जबकि कुछ उन पर कट्टरता और अत्याचार के आरोप लगाते हैं।
फिलहाल, यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में नया सियासी मोड़ ले चुका है और आने वाले दिनों में इस पर बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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