गुना: नदी-नालों पर 800 अतिक्रमण, धन्नासेठों तक की मिलीभगत—क्या कलेक्टर किशोर कन्याल चला पाएंगे बुलडोज़र?

Sep 20, 2025 - 20:12
Sep 20, 2025 - 20:22
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गुना: नदी-नालों पर 800 अतिक्रमण, धन्नासेठों तक की मिलीभगत—क्या कलेक्टर किशोर कन्याल चला पाएंगे बुलडोज़र?

गुना (आरएनआई) इसमें कोई दो राय नहीं कि गुना शहर के सभी नदी नालों, नालियों, गटर पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण हैं।इतना ही नहीं बिना सक्षम अनुमति के और सिंचाई विभाग की एनओसी के बगैर भू माफियाओं ने अपनी जमीनों की कीमत बढ़ाने के लिए अवैध रूप से छोटी छोटी पुलियाएं भी बना डालीं,

 अवैध कॉलोनियों भी काट कर बेच दीं, मास्टर प्लान की ऐसी तैसी कर दी, उनका आजतक सक्षम प्रशासन ने क्या बिगाड़ लिया?

गुनिया नदी/नाले में स्टेट टाइम में निर्मित स्टॉप डैम की दीवार तक पर प्लॉटिंग और फ्लैटिंग हो गई। लेकिन किसी ने नहीं रोका।

 प्रधानमंत्री आवास योजना के 11 मकान भी नगरपालिका के कर्णधारों ने गुनिया की छाती पर बनवा डाले, तब भी किसी ने नहीं रोका। कौन रोकता? जिन्हें रोकना था उन्हीं की शह पर, उन्हीं की मिलीभगत से, उन्हीं की देखरेख में, उन्हीं की नाक के नीचे ही तो ये सब चल रहा था। 

राजस्व अमला अपने हित देखता रहा। नेताओं ने अपने हित देखे।

 नगरपालिका तो है ही कमाई का अड्डा उसके नुमाइंदे भी क्यों देखते। हितग्राही ने अपने हित देखे। लेकिन किसी ने भी निजी हितों से ऊपर उठकर इस गुना शहर के हित को नहीं देखा। किसी ने भी नहीं सोचा कि नदी नालों की हत्या करना भविष्य में गुना को बाढ़ के खतरे में डालना है। 

चंद अतिक्रमण जिनकी संख्या 2021 से पहिले मात्र 77 थी वह बढ़ गई। जब ये अतिक्रमण बढ़े तब भी किसी ने नहीं देखा। इस बार इनकी संख्या लगभग 800 के आसपास पहुंच गई। नाले के किनारों पर शहर के धन्नासेठों से लेकर नेताओं समाजसेवियों द्वारा भी अतिक्रमण कर लिए गए, निर्माण निषेध क्षेत्र में निर्माण होते गए। इन निर्माणों को कौन ने रोका? और नहीं रोका तो क्यों?

चलो जो हुआ सो हुआ। 29 जुलाई को बाढ़ से मची तबाही के बाद शुरुआत में अतिक्रमण हटाने की जो मुहिम चली थी, मशीनें गरजीं थीं, उससे प्रशासन के इरादों को लेकर एक अच्छा संदेश गया था। 15 जेसीबी पोकलेन चल रहीं थीं तो लगा था कि अतिक्रमण हटा कर ही इन मशीनों के इंजन ठंडे होंगे। लेकिन पिछले 20 दिनों से सांकेतिक कार्यवाही सी चल रही है, जिससे सवाल उठ रहा है कि कहीं प्रशासन अतिक्रमण लॉबी के दवाब में तो नहीं आ गया? कहीं कुछ लोग मैनेज तो नहीं हो गए?

इसमें कोई दो मत नहीं कि पूंजीपतियों की प्रेशर लॉबी पूरी ताकत से एक्टिव है कि नदी नालों से अतिक्रमण हटाने की मुहीम बंद हो। इसलिए पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा ने जो कहा कि मैं एक भी गरीब का मकान नहीं टूटने दूंगा। इसे इस रूप में देखना चाहिए कि सरकार के बुलडोजर सिर्फ गरीबों के मकान न तोड़ें बल्कि धन्नासेठों के अतिक्रमण पहले तोड़े जाएं।

उम्मीद है कि जिले के शानदार कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल Collector Office Guna गुना शहर के व्यापक हित को देखते हुए, अतिक्रमण हटाने की मुहीम को फिर से प्रभावी गति देंगे, जिससे शहर के नदी नाले अतिक्रमण के कोढ़ से मुक्त हो सकें। और फिर कभी 29 जुलाई 2025 जैसी बाढ़ न आए।

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