दक्षिणी अफ़्रीका में भीषण बाढ़: जलवायु परिवर्तन ने तबाही को और तीव्र बनाया, 100 से अधिकों की मौत
नई दिल्ली (आरएनआई)। दक्षिणी अफ़्रीका में हाल ही में आए मूसलाधार वर्षा और भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। इस आपदा को लेकर World Weather Attribution नामक शोध समूह की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि **मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने इन बारिशों और बाढ़ की तीव्रता को पहले से कहीं अधिक खतरनाक बनाया है।
अध्ययन के अनुसार दक्षिणी अफ़्रीका, मोज़ाम्बिक और ज़िम्बाब्वे जैसे देशों में सिर्फ 10 दिनों के भीतर पूरे एक साल के बराबर बारिश दर्ज की गई, जिससे घर, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचा गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। कई क्षेत्रों में सड़कों और पुलों का बह जाना और घरों के पानी में डूब जाना इस आपदा की भयावहता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश सामान्य नहीं थी और इस तरह की तीव्र वर्षा आम तौर पर 50 साल में एक बार होती है। लेकिन मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने इन गंभीर बारिश की तीव्रता में लगभग 40% की वृद्धि की है, जिससे स्थिति अत्यंत विनाशकारी रूप ले रही है। मौजूदा ला नीना मौसम प्रणाली भी इस बार अधिक गर्म वातावरण में सक्रिय थी, जिससे बारिश और बाढ़ का प्रभाव और गहरा हुआ।
इन बाढ़ों की वजह से लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित होकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग रहे हैं, बुनियादी सुविधाओं की कमी और स्वास्थ्य संबंधी संकट का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित हो गई है और पानीजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों ने अफ़्रीका के लिए स्थानीय जलवायु मॉडल विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं का बेहतर पूर्वानुमान और प्रभावी तैयारी की जा सके।
इस आपदा ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को उजागर किया है, जहां बढ़ती गर्मी और मॉनसून पैटर्न की अनिश्चितता ने अचानक और घातक प्राकृतिक घटनाओं की संभावना को बढ़ाया है।
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