ढाका (आरएनआई)। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले सियासी परिदृश्य तेजी से बदलता नजर आ रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने चुनाव से छह दिन पहले अपना घोषणापत्र जारी करते हुए हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए फंडिंग बढ़ाने का बड़ा वादा किया है। वहीं, पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के गृह जिले गोपालगंज में अवामी लीग का चुनाव चिह्न ‘नाव’ मतपत्रों से गायब रहेगा, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं।
बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान की ओर से जारी 51-सूत्री घोषणापत्र में पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध, सीमापार हत्याओं और घुसपैठ को रोकने के उपायों की बात कही गई है। घोषणापत्र में कहा गया है कि पार्टी “बांग्लादेश फर्स्ट” को शासन का मूल मंत्र बनाएगी और समानता, सहयोग व आपसी सम्मान के आधार पर पड़ोसियों के साथ रिश्ते मजबूत करेगी। भारत का नाम लिए बिना बीएनपी ने पद्मा (गंगा), तीस्ता समेत सभी सीमा पार नदियों से बांग्लादेश के उचित जल हिस्से को सुनिश्चित करने का वादा भी किया है।
तारिक रहमान ने कहा कि देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता को बनाए रखते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंध आगे बढ़ाए जाएंगे और सामूहिक प्रगति पर जोर दिया जाएगा। यह घोषणापत्र ऐसे समय सामने आया है, जब अवामी लीग चुनावी दौड़ से बाहर है और बदले राजनीतिक माहौल में बीएनपी सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही है। गौरतलब है कि पिछले महीने बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद तारिक रहमान को पार्टी की कमान सौंपी गई थी।
इस बीच, दशकों में पहली बार गोपालगंज में मतपत्रों से अवामी लीग का नाव चिन्ह हटाया गया है। अब वहां बीएनपी, जमात-ए-इस्लामी और निर्दलीय उम्मीदवारों के चुनाव चिन्ह दिखाई देंगे। सड़कों पर लगे पोस्टर-बैनरों से भी शेख हसीना और उनकी पार्टी की अनुपस्थिति ने मतदाताओं के बीच निराशा और असमंजस पैदा किया है। गोपालगंज लंबे समय से अवामी लीग का सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है और यही शेख हसीना व बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान का गृह क्षेत्र है।
शेख हसीना ने 2024 तक लगातार 15 वर्षों से अधिक समय तक शासन किया था, हालांकि इस दौरान विपक्ष ने कई चुनावों का बहिष्कार भी किया। हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग आधे पूर्व अवामी लीग समर्थक अब बीएनपी की ओर झुकते दिख रहे हैं, जबकि करीब 30 प्रतिशत मतदाता जमात-ए-इस्लामी के पक्ष में हैं। ढाका स्थित शोध संस्थानों का कहना है कि पूर्व अवामी लीग मतदाता अब विपक्षी विकल्पों को गंभीरता से अपना रहे हैं।
चुनाव से पहले माहौल उस समय और तनावपूर्ण हो गया, जब इंकलाब मोर्चा के हजारों प्रदर्शनकारियों ने ढाका में अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के सरकारी आवास में घुसने की कोशिश की। पुलिस के साथ झड़प के दौरान आंसू गैस, साउंड ग्रेनेड और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि दिसंबर 2025 में पलटन इलाके में मारे गए उस्मान हादी के हत्यारों को गिरफ्तार किया जाए। झड़प में करीब 50 लोग घायल हुए हैं।
इन घटनाओं के बीच बांग्लादेश का चुनावी माहौल बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां बीएनपी और जमात को बढ़त मिलती नजर आ रही है, जबकि अवामी लीग की गैरमौजूदगी ने राजनीति की दिशा ही बदल दी है।