तंत्र साधना में गुरु की भूमिका सर्वोपरि, बिना मार्गदर्शन के खतरनाक हो सकती है साधना
कादीपुर (आरएनआई)। तंत्र को एक गूढ़ और शक्तिशाली आध्यात्मिक विज्ञान माना जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की चेतना का विस्तार और आंतरिक शक्तियों का जागरण है। विशेषज्ञों के अनुसार तंत्र साधना बिना गुरु के करना बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इसके कई अनुष्ठान गुप्त और जटिल होते हैं।
संस्कृत की ‘तन’ धातु से बना शब्द तंत्र का अर्थ है ‘विस्तार करना’। इसका लक्ष्य साधक को विशेष सिद्धियों और शक्तियों की प्राप्ति कराना है। लेकिन यह प्रक्रिया तभी सुरक्षित और सफल हो सकती है, जब एक योग्य गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त हो।
गुरु न केवल साधक को तंत्र की गूढ़ विधियां समझाते हैं, बल्कि उसे मानसिक, आत्मिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाते हैं। गुरु शिष्य को दीक्षा देते हैं और उसके सूक्ष्म शरीर के विकास और संरक्षण का मार्ग दिखाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक योग्य तांत्रिक गुरु के गुणों में गहन ज्ञान, करुणा, आत्मसंयम, स्थिरता और साधना का गहरा अनुभव होना चाहिए। वही साधक को जोखिम भरे अनुष्ठानों से बचाते हुए सही दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं।
भारत में कई तंत्र गुरु अपनी मान्यताओं और शिक्षाओं के लिए प्रसिद्ध हैं, हालांकि यह कहना कठिन है कि सबसे बड़ा तंत्र गुरु कौन है। यह विषय व्यक्तिगत आस्था और मान्यताओं पर आधारित है। जानकारों का कहना है कि किसी भी गुरु को स्वीकार करने से पहले विवेक और सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र में कई लोग स्वयं को गुरु होने का दावा करते हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
1
Love
0
Funny
0
Angry
1
Sad
0
Wow
0



