स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर एमवीए का मंथन शुरू, उद्धव-राज ठाकरे समेत गठबंधन दलों के नेता बैठक में शामिल
मुंबई (आरएनआई) महाराष्ट्र में होने वाले आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में गुरुवार को मुंबई के यशवंतराव बलवंतराव चव्हाण सेंटर में एमवीए नेताओं की अहम बैठक आयोजित हुई, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे, और गठबंधन के अन्य शीर्ष नेता शामिल हुए।
यह बैठक न केवल चुनावी रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की उपस्थिति ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत भी दिए हैं। गौरतलब है कि राज ठाकरे ने 2005 में शिवसेना से अलग होकर एमएनएस की स्थापना की थी और उस समय दोनों भाइयों के बीच गहरा राजनीतिक मतभेद था। लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों को भारी पराजय के बाद, अब दोनों नेताओं ने एकजुट होकर नए राजनीतिक समन्वय की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
कुछ महीनों पहले, 5 जुलाई को उद्धव और राज ठाकरे ने एक संयुक्त रैली भी की थी, जिसमें उन्होंने भाजपा-नीत राज्य सरकार के उस फैसले का विरोध किया था जिसके तहत प्राथमिक स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य किया गया था। यह रैली दोनों दलों के बीच सहयोग की संभावनाओं की शुरुआत मानी गई थी। अब 2026 से पहले होने वाले निकाय चुनावों के मद्देनजर शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस के बीच गठबंधन की संभावना और मजबूत होती दिख रही है।
इसी बीच, महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में वीवीपैट मशीनों का उपयोग नहीं किया जाएगा, क्योंकि वर्तमान कानूनों या नियमों में इसके इस्तेमाल का कोई प्रावधान नहीं है। विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस, ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वीवीपैट के प्रयोग की मांग की थी। कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने सुझाव दिया था कि यदि वीवीपैट का प्रयोग संभव नहीं है, तो चुनाव मतपत्र के जरिए कराए जाएं।
आयोग ने यह भी बताया कि राज्य में अधिकांश स्थानीय निकाय चुनाव बहु-सदस्यीय वार्ड प्रणाली के तहत कराए जाते हैं, और फिलहाल इस संबंध में समिति की अंतिम रिपोर्ट लंबित है। आयोग के मुताबिक, ईवीएम का उपयोग वर्ष 2005 से नियमों में जोड़ा गया था, लेकिन वीवीपैट से संबंधित कोई कानूनी संशोधन अब तक नहीं किया गया है।
अब राजनीतिक हलकों में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उद्धव और राज ठाकरे की यह नजदीकी क्या आगामी बीएमसी चुनाव में नए गठबंधन का रूप लेगी या यह केवल रणनीतिक समझदारी तक सीमित रहेगी।
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