‘सोनम वांगचुक का HIAL कर रहा अनुकरणीय कार्य’, संसदीय समिति ने यूजीसी मान्यता देने की सिफारिश की
नई दिल्ली (आरएनआई)। पर्यावरणविद् और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक द्वारा स्थापित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (एचआईएएल) के कार्यों की सराहना करते हुए शिक्षा, महिला, युवा और खेल मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने इसे शानदार और अनुकरणीय बताया है। समिति ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से एचआईएएल को शीघ्र मान्यता देने की सिफारिश करते हुए अब तक मान्यता न मिलने पर गंभीर चिंता जताई है।
इस सप्ताह संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि एचआईएएल कई वर्षों से उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है, इसके बावजूद यूजीसी की मान्यता का मामला लंबित है। समिति ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इस पर शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समिति ने शिक्षा मंत्रालय को सुझाव दिया कि एचआईएएल के शैक्षणिक मॉडल का गहन अध्ययन किया जाए और इसे शिक्षा में नवाचार केंद्रों या अन्य उपयुक्त माध्यमों के जरिये देश के अन्य हिस्सों में दोहराने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। रिपोर्ट के अनुसार, लद्दाख दौरे के दौरान समिति एचआईएएल के शैक्षणिक, शोध और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र से विशेष रूप से प्रभावित हुई। स्थानीय सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संदर्भों से जुड़ी अनुभवात्मक शिक्षा को लागू करने में संस्थान की सफलता को समिति ने उल्लेखनीय बताया।
समिति ने यह भी रेखांकित किया कि एचआईएएल ने स्थानीय समुदाय पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव डाला है। ‘आइस स्तूप’ जैसे नवाचारों और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। समिति के अनुसार, एचआईएएल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना को साकार करने का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें अनुभवात्मक और परियोजना आधारित शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता और भारतीय ज्ञान प्रणालियों के समावेश पर बल दिया गया है।
रिपोर्ट में दोहराया गया कि यूजीसी को एचआईएएल को मान्यता देनी चाहिए और साथ ही इसके मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए एक मिसाल के रूप में देखा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुई हिंसक घटनाओं के बाद सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था। इन घटनाओं में चार लोगों की मौत और करीब 90 लोग घायल हुए थे। सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था। इसके बाद लद्दाख प्रशासन ने एचआईएएल को आवंटित भूमि को रद्द कर दिया, जबकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए संस्थान का एफसीआरए पंजीकरण भी निरस्त कर दिया।
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