सहरिया क्रांति के योद्धा कल्याण आदिवासी का निधन, शोषितों की मुखर आवाज़ हुई मौन
शिवपुरी (आरएनआई) आदिवासी अंचल में अन्याय और दमन के विरुद्ध बिगुल फूंकने वाले सहरिया क्रांति के आधार स्तंभ, कल्याण आदिवासी (निवासी डबिया) अब हमारे बीच नहीं रहे। आज शाम हृदयघात (हार्ट अटैक) के कारण उनका आकस्मिक निधन हो गया। यह दुखद घटना उस समय हुई जब वे अपने कार्यक्षेत्र यानी अपने खेत पर काम कर रहे थे। मिट्टी से जुड़े इस क्रांतिकारी ने अंतिम सांस भी अपनी माटी की सेवा करते हुए ही ली।
कल्याण आदिवासी मात्र एक नाम नहीं, बल्कि शिवपुरी के आदिवासी अंचल में शोषण, दमन और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का एक जीवंत प्रतीक थे। उन्होंने संजय बेचैन के साथ मिलकर उस दौर में मोर्चा खोला जब गरीबों और पिछड़ों की आवाज़ को दबाना आम बात थी। सहरिया समुदाय के उत्थान और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। चाहे भूमि सुधार की लड़ाई हो या प्रशासनिक अन्याय के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन, कल्याण जी हमेशा पंक्ति में सबसे आगे खड़े मिलते थे।
परिजनों के अनुसार, कल्याण जी आज शाम अपने खेत पर कृषि कार्य में व्यस्त थे, तभी अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा। जब तक उन्हें चिकित्सीय सहायता मिल पाती, नियति उन्हें हमसे छीन चुकी थी। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे जिले के आदिवासी समाज और क्रांतिकारी साथियों में शोक की लहर दौड़ गई है। सहरिया क्रांति परिवार के संयोजक संजय बेचैन ने उनके निधन को एक अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा, कल्याण भाई का जाना मेरे लिए एक व्यक्तिगत और अपूरणीय क्षति है। उन्होंने गरीबों को न्याय दिलाने के लिए जो मशाल जलाई थी, हम उसे बुझने नहीं देंगे।
ऊधम आदिवासी, विजय आदिवासी, औतार भाई सहरिया, अजय आदिवासी, स्वदेश आदिवासी, अनिल आदिवासी, मोहर सिंह आदिवासी, आशा राम आदिवासी, केशव सरपंच और दिलीप आदिवासी सहित पूरे सहरिया क्रांति परिवार ने उन्हें अपनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की है।
कल्याण आदिवासी भले ही शारीरिक रूप से विदा हो गए हों, लेकिन उनके द्वारा किए गए समाज उत्थान के कार्य और अन्याय के विरुद्ध लड़ने का जज्बा आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
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