राजाजी नेशनल पार्क के पास अवैध निर्माण से जुड़ी अर्जी पर शीर्ष कोर्ट ने जताई नाराजगी

कोर्ट ने उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क के पास अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई का आरोप लगाकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रायोजित याचिका लगती है। किसी को भी शीर्ष अदालत के अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं है।

Dec 20, 2024 - 15:14
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राजाजी नेशनल पार्क के पास अवैध निर्माण से जुड़ी अर्जी पर शीर्ष कोर्ट ने जताई नाराजगी

नई दिल्ली (आरएनआई) सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी को भी शीर्ष अदालत के अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं है। कोर्ट ने उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क के पास अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई का आरोप लगाकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रायोजित याचिका लगती है।

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ को उत्तराखंड सरकार के वकील ने बताया कि पार्क की जिस जमीन पर अवैध निर्माण की बात कही गई है, निरीक्षण के दौरान वह जमीन निजी संपत्ति पाई गई। वकील ने कहा कि आवेदक ने अवैध निर्माण आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर जमीन की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया था। 

वकील ने कहा कि जांच के दौरान यह निजी भूमि पाई गई। यहां पर प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र चलाया जा रहा था। साथ ही पोर्टा केबिन कॉटेज बनाए जा रहे थे। वहीं सुनवाई के दौरान आवेदक के वकील ने कई पेड़ों की कटाई के अलावा राष्ट्रीय उद्यान के पास बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण का दावा किया।

इस पर राज्य के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता ने याचिका में भूमि मालिक को प्रतिवादी के रूप में भी शामिल नहीं किया। इसके बाद शीर्ष अदालत की पीठ ने याचिकाकर्ता से भूमि के मालिक को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने के लिए कहा। अदालत ने कहा कि इसके बाद आवेदन की एक प्रति शीर्ष अदालत के न्याय मित्र को भी दी जाए। मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। 

इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देने की मांग की। इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि निर्माण किसी कानून या शीर्ष अदालत द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो वह इसे ध्वस्त करने का आदेश दे सकता है। अगर ऐसा नहीं पाया जाता है, तो हम आवेदन को 10 लाख रुपये के जुर्माने के साथ खारिज कर सकते हैं। पीठ ने कहा कि किसी को भी शीर्ष अदालत के अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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