माओवाद पर बड़ा प्रहार: 1825 दिन में 1106 नक्सली ढेर, 5571 ने किया आत्मसमर्पण

Dec 9, 2025 - 16:31
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माओवाद पर बड़ा प्रहार: 1825 दिन में 1106 नक्सली ढेर, 5571 ने किया आत्मसमर्पण

नई दिल्ली (आरएनआई)। केंद्र सरकार की सख्त नीति और समन्वित रणनीति के तहत देश में माओवादी हिंसा पर लगातार प्रभावी अंकुश लगता दिखाई दे रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, पिछले 1825 दिनों यानी 2019 से अब तक सुरक्षा बलों ने 1106 नक्सलियों को मार गिराया है, जबकि 7311 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस दौरान 5571 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण करके मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना है।

2014 से अब तक कुल 9588 माओवादी हथियार डाल चुके हैं, जिनमें 2167 आत्मसमर्पण इसी वर्ष दर्ज किए गए हैं। मंत्रालय का दावा है कि इन प्रयासों से 2010 की तुलना में वर्ष 2024 में नक्सली घटनाओं में 81 फीसदी की गिरावट आई है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में बताया कि वामपंथी उग्रवाद भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है, जिसने हजारों निर्दोषों की हत्या कर देश को गहरी क्षति पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि 1967 से चली आ रही इस समस्या ने एक समय पशुपतिनाथ से लेकर तिरुपति तक फैले विशाल क्षेत्र को ‘रेड कॉरिडोर’ का स्वरूप दे दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह क्षेत्र अब काफी सीमित रह गया है। मंत्री ने विश्वास जताया कि मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद का पूरी तरह सफाया हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि पिछली सरकारें नक्सलवाद को केवल राज्य का मुद्दा मानती रहीं, लेकिन मोदी सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौती मानकर समग्र नीति अपनाई। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सुरक्षा अभियान के साथ—साथ विकास को भी तेज गति दी गई है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, मोबाइल नेटवर्क, शैक्षणिक संस्थानों, कौशल विकास केंद्रों, डाकघरों और बैंकों का तेजी से विस्तार किया गया है।

सुरक्षा बलों की क्षमताएं बढ़ाने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आवश्यक फंड उपलब्ध कराया गया है और वर्तमान में 574 सीएपीएफ कंपनियां नक्सल इलाकों में तैनात हैं। अब सुरक्षा एजेंसियों के प्रति नक्सलियों की लड़ाकू क्षमता बेहद कमजोर हो चुकी है। 2019 से अब तक 29 शीर्ष नक्सली कमांडर मारे गए हैं, जिनमें 14 का खात्मा इसी वर्ष हुआ है।

सरेंडर कर चुके उग्रवादियों के पुनर्वास के लिए भी सरकार उदार नीति लागू कर रही है। उच्च कैडर को 5 लाख रुपये, अन्य कैडर को 2.5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता, हथियार के साथ आत्मसमर्पण करने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन तथा तीन वर्ष तक मासिक वजीफा के रूप में सहयोग दिया जा रहा है ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें।

सरकारी प्रयासों के परिणामस्वरूप नक्सलवाद अपनी अंतिम साँसें गिन रहा है और सरकार का लक्ष्य है कि सुरक्षा और विकास के दोहरे अभियान से देश को इस खतरे से जल्द ही पूरी तरह मुक्त किया जा सके।

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