भारत-अमेरिका वायुसेना का संयुक्त युद्धाभ्यास: दक्षिण भारत में सुखोई-30 और बी-1बी लांसर ने भरी संयुक्त उड़ान
नई दिल्ली (आरएनआई)। भारत और अमेरिका की वायुसेनाएं इस समय दक्षिण भारत में चल रहे द्विपक्षीय वायु युद्धाभ्यास में भाग ले रही हैं। 10 नवंबर से शुरू हुए इस अभ्यास में दोनों देशों के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान पहली बार एक साथ आसमान में उड़ान भरते दिखाई दिए। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई और मिराज-2000 ने अमेरिकी वायुसेना के बी-1बी लांसर सुपरसोनिक बमवर्षक के साथ संयुक्त मिशन में हिस्सा लिया। यह पहली बार है जब सुखोई-30 अमेरिकी बी-1बी लांसर के साथ समन्वित उड़ान में शामिल हुआ है।
भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस अभ्यास की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि यह युद्धाभ्यास दोनों वायुसेनाओं के बीच सीख, सहयोग और अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।
बी-1बी लांसर, जो लंबी दूरी के मिशनों में सटीक हमलों के लिए जाना जाता है, इस वर्ष फरवरी में एयरो इंडिया शो 2025 में भी आकर्षण का केंद्र रहा था।
वायुसेना अधिकारियों के अनुसार, यह अभ्यास गुरुवार तक जारी रहेगा, जिसमें कई प्रकार के समन्वित हवाई मिशन, टार्गेट अटैक सिमुलेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ड्रिल्स आयोजित की जा रही हैं। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं की संयुक्त संचालनात्मक क्षमता और आपसी विश्वास को मजबूत करना है।
पूर्वी प्रचंड प्रहार: पूर्वी हिमालय में संयुक्त सैन्य समन्वय का प्रदर्शन
इस बीच भारतीय सेनाओं ने पूर्वी हिमालय की दुर्गम घाटियों में ‘एक्सरसाइज पूर्वी प्रचंड प्रहार’ के जरिये शानदार सामरिक कौशल का प्रदर्शन किया। पूर्वी कमान के तत्वावधान में आयोजित इस व्यापक संयुक्त अभ्यास में भारतीय थलसेना की स्पीयरहेड डिवीजन, वायुसेना, नौसेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अभूतपूर्व समन्वय दिखाया।
बर्फ से ढके पर्वतीय इलाकों में हुए इस अभ्यास का उद्देश्य था — तेजी से फोर्स मोबिलाइजेशन, सटीक तालमेल, और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की क्षमता को परखना। अधिकारियों के मुताबिक, आईटीबीपी की सक्रिय भागीदारी ने सैन्य बलों और नागरिक एजेंसियों के बीच सहयोग को नई ऊंचाई दी है। यह अभ्यास भारत के आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनने के संकल्प को मजबूती देता है।
‘अखंड प्रहार’ में त्रिशूल ढांचे की झलक: तीनों सेनाओं की संयुक्त शक्ति का प्रदर्शन
इसी क्रम में पश्चिमी क्षेत्र में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के अंतर्गत कोणार्क कोर की टुकड़ियां जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाके में चल रहे अखंड प्रहार अभ्यास में भाग ले रही हैं।
यह अभ्यास तीनों सेनाओं — थल, वायु और नौसेना — के संयुक्त ढांचे ‘त्रिशूल’ के तहत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य संयुक्त युद्ध तत्परता और संचालनात्मक एकीकरण को परखना है।
इस अभ्यास के दौरान नवगठित रुद्र इंटीग्रेटेड ऑल आर्म्स ब्रिगेड ने भी थार मरुस्थल में अपने ऑपरेशनल वेलिडेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया।
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