जन्म और मृत्यु के भय को समाप्त करने वाला दिव्य ग्रंथ है श्रीमद्भागवत महापुराण : पण्डित रामांश पाराशर

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

Jul 4, 2025 - 13:45
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जन्म और मृत्यु के भय को समाप्त करने वाला दिव्य ग्रंथ है श्रीमद्भागवत महापुराण : पण्डित रामांश पाराशर

वृन्दावन (आरएनआई) श्रीहित हरिवंश नगर स्थित वानप्रस्थ धाम फेस-1 में श्रीराधा माधव सेवा संस्थान ट्रस्ट के तत्वावधान में अष्ट दिवसीय गुरुपूर्णिमा महोत्सव अत्यन्त श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ प्रारम्भ हो गया है।महोत्सव का शुभारभ वानप्रस्थ धाम के संस्थापक डॉ. चतुर नारायण पाराशर महाराज के पावन सानिध्य में ठाकुरजी के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया।इससे पूर्व गाजे-बाजे के मध्य श्रीमद्भागवतजी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई।जिसमें पीत वस्त्र पहने हुए सैकड़ों महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण किए साथ चल रही थीं।तत्पश्चात मुख्य यजमान श्रीमती किरण शुक्ला व डॉ. अमरेश चंद्र शुक्ला द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य व्यासपीठ का पूजन-अर्चन किया गया।

व्यास पीठ पर आसीन पण्डित रामांश पाराशर महाराज ने देश-विदेश से आए समस्त भक्तों-श्रद्धालुओं को अपनी सुमधुर वाणी के द्वारा श्रीमद्भागवत का महात्म्य श्रवण कराते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यासजी महाराज के द्वारा रचित और श्रीशुकदेवजी के मुख से प्रवाहित श्रीमद्भागवत महापुराण सम्पूर्ण सिद्धांतों का निष्कर्ष बताने वाला तथा जन्म और मृत्यु के भय को समाप्त करने वाला दिव्य ग्रंथ है।ये हमारे अंदर भक्ति प्रवाह को बढ़ाकर भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने का सबसे मुख्य साधन है। प्रेम से इसका श्रवण करने से हमारा मन और तन दोनों ही पवित्र हो जाते हैं।

महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे विश्वविख्यात भागवताचार्य डॉ.श्याम सुंदर पाराशर, महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद महाराज, आचार्य नेत्रपाल शास्त्री (गुरुजी), प्रख्यात साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, डॉ. शिवम् साधक महाराज एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. रामसुदर्शन मिश्र आदि ने वानप्रस्थ धाम के संस्थापक डॉ. चतुर नारायण पाराशर महाराज के यशस्वी सुपुत्र पण्डित रामांश पाराशर के प्रथम बार श्रीमद्भागवत की कथा कहने पर उन्हें अनन्त शुभकामनाएं व बधाई दीं।साथ ही प्रभु से यह कामना की, कि वे भी अपने पूज्य पिताश्री की भांति विश्वभर में भारतीय वैदिक सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार कर असंख्य व्यक्तियों को धर्म व प्रभु भक्ति के मार्ग से जोड़े।
महोत्सव में आए सभी आगंतुक अतिथियों को डॉ. चतुर नारायण पाराशर ने स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं ठाकुरजी का पटुका-प्रसादी-माला आदि भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर सुशील राजवंशी (बीकानेर), आचार्य पवन पाराशर, डॉ. राधाकांत शर्मा, पंकज गुप्ता आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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