काशी में पूर्वांचल की सबसे बड़ी धर्मशाला का भव्य उद्घाटन, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया लोकार्पण
वाराणसी (आरएनआई)। धर्म, आस्था और संस्कृति की राजधानी काशी में शुक्रवार को भव्य आयोजन के बीच पूर्वांचल की सबसे बड़ी नाटकोटक्षेत्रम धर्मशाला का उद्घाटन किया गया। इस धर्मशाला का लोकार्पण उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर पूरा परिसर श्रद्धा और उत्साह से गूंज उठा।
उद्घाटन समारोह में उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि इस धर्मशाला का निर्माण सेवा और समर्पण की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि काशी जैसे पवित्र तीर्थस्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इतनी भव्य धर्मशाला का बनना गौरव की बात है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी में अब भक्ति और विकास दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह धर्मशाला आने वाले वर्षों तक देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आश्रय और सेवा का केंद्र बनेगी।
10 मंजिला आधुनिक भवन के रूप में निर्मित यह धर्मशाला रथयात्रा क्षेत्र में स्थित है। लगभग 910.5 वर्गमीटर क्षेत्र में फैली इस इमारत का निर्माण 65 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। शिलान्यास 17 अप्रैल 2024 को हुआ था और निर्माण कार्य चेन्नई की प्रतिष्ठित संस्था यूआरसी कंस्ट्रक्शन द्वारा पूरा किया गया। धर्मशाला में 140 एसी कमरे बनाए गए हैं, जिनमें एक साथ करीब 500 श्रद्धालु ठहर सकते हैं। सभी कमरों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, और श्रद्धालुओं के लिए सुईट रूम, लॉबी और अन्य सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है।
परिसर में 174 कार पार्किंग की जगह दी गई है, साथ ही श्रद्धालुओं को तीन वक्त का निशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। नाटकोटक्षेत्रम धर्मशाला में सस्ते दरों पर कमरे बुक किए जा सकेंगे, जिसका किराया जल्द तय किया जाएगा।
धर्मशाला श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस क्षेत्र में पहले से 54 धर्मशालाएं हैं, परंतु नाटकोटक्षेत्रम धर्मशाला आकार, सुविधा और निर्माण गुणवत्ता के मामले में सबसे बड़ी और आधुनिक है। दक्षिण भारत से बड़ी संख्या में काशी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह धर्मशाला विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी।
उद्घाटन कार्यक्रम में दक्षिण भारत से आए अनेक श्रद्धालु, धार्मिक नेता और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
यह धर्मशाला न केवल श्रद्धालुओं के ठहरने का स्थान बनेगी, बल्कि काशी की भक्ति, सेवा और आध्यात्मिकता की परंपरा को और मजबूत करेगी।
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