कार्तिगई दीपम विवाद: मद्रास हाईकोर्ट ने 11 श्रद्धालुओं को दीप जलाने की अनुमति, CISF को सुरक्षा देने का आदेश
मदुरै (आरएनआई) मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने वार्षिक कार्तिगई दीपम उत्सव के दौरान तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी की चोटी पर दीपम जलाने की अनुमति याचिकाकर्ता समेत 11 लोगों को प्रदान की है। कोर्ट ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को निर्देश दिया कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान श्रद्धालुओं को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने यह आदेश उस अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक दिसंबर के कोर्ट आदेश के बावजूद अरुलमिघु सुब्रमणियस्वामी मंदिर प्रशासन ने दीपथून पर दीप जलाने की व्यवस्था नहीं की। अदालत ने माना कि मंदिर प्रशासन ने पूर्व आदेश का उल्लंघन किया है।
बुधवार शाम प्रशासन ने उची पिल्लैयार मंदिर में दीप जलाया, परंतु दीपथून पर दीप प्रज्वलन नहीं किया गया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आदेश के पालन में जानबूझकर देरी की गई और श्रद्धालुओं की धार्मिक परंपराओं की अनदेखी हुई।
याचिकाकर्ता रामा रविकुमार ने आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस राजनीतिक दबाव में आकर अदालत के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने मंदिर प्रशासन को आदेश की प्रति और दीप जलाने के लिए आवश्यक सामग्री सौंप दी थी, इसके बावजूद दोपहर तक कोई तैयारी नहीं की गई।
इस बीच, तिरुपरनकुंद्रम क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू हैं और पुलिस ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। रविकुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि CISF सुरक्षा में भी बाधा डाली गई तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा और वे कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस देश में हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार नहीं है?
इधर राज्य के विभिन्न हिस्सों में कार्तिगई दीपम महोत्सव की भव्यता जारी है। मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर से लेकर थूथुकुड़ी के शंकर रामेश्वरर मंदिर तक दीपों की रोशनी से वातावरण जगमगा उठा। तिरुपरनकुंद्रम सुब्रमणियस्वामी मंदिर में भी 10 दिवसीय उत्सव के तहत पाट्टाभिषेकम सहित पारंपरिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं, जो सात दिसंबर तक चलेंगे।
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