आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील के इस्पात संयंत्र को पर्यावरण मंजूरी पर फैसला टला, विशेषज्ञ समिति ने मांगे अतिरिक्त स्पष्टीकरण
हैदराबाद (आरएनआई)। आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली जिले में प्रस्तावित आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया लिमिटेड (AMNSIL) के विशाल इस्पात संयंत्र को फिलहाल पर्यावरण मंजूरी नहीं मिल पाई है। केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने इस परियोजना पर अपना निर्णय टालते हुए कंपनी से कुछ अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे हैं।
यह संयंत्र 8.2 मिलियन टन प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता वाला होगा और इसके लिए 1.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। मंत्रालय की समिति की बैठक 30 अक्तूबर 2025 को हुई थी, जिसमें इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के बाद मंजूरी को स्थगित करने का फैसला लिया गया।
क्या है समिति की आपत्ति
समिति ने स्पष्ट करने के लिए कहा है कि क्या इस परियोजना पर जीएसआर 85(ई) अधिसूचना लागू होती है, क्योंकि इसी स्थल को पहले भी पर्यावरण मंजूरी मिल चुकी थी। मंत्रालय ने इंड-1 सेक्टर से इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
परियोजना से बड़ा निवेश और रोजगार सृजन
कंपनी ने पर्यावरण प्रबंधन योजना (EMP) के तहत लगभग 3,540 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि रखरखाव पर हर साल 355 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। संयंत्र निर्माण के दौरान लगभग 23,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है — जिनमें 800 प्रत्यक्ष और 22,200 अप्रत्यक्ष होंगे। संयंत्र शुरू होने के बाद 7,500 लोगों को रोजगार मिलेगा, जिनमें 3,000 प्रत्यक्ष और 4,500 अप्रत्यक्ष होंगे। कंपनी का कहना है कि स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी, बशर्ते वे आवश्यक योग्यता रखते हों।
नई अधिसूचना और अनुपालन की स्थिति
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने 30 जनवरी 2025 को जीएसआर 85(ई) अधिसूचना जारी की थी, जिसमें औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए नए स्थान निर्धारण मानक तय किए गए थे। एएमएनएसआईएल को यह जमीन अधिसूचना से पहले ही आवंटित हो चुकी थी, लेकिन कंपनी ने नए नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 13 अक्तूबर 2025 को आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (APPCB) से प्रमाणपत्र मांगा। एपीपीसीबी ने सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 17 अक्तूबर 2025 को अनुपालन प्रमाणपत्र जारी किया।
तकनीकी त्रुटियां और संशोधन की प्रक्रिया जारी
एक सूत्र के अनुसार, मंत्रालय को खुद एहसास हुआ है कि जीएसआर 85(ई) अधिसूचना में कुछ तकनीकी त्रुटियां हैं, जिन्हें अब संशोधित किया जा रहा है। मंत्रालय जल्द नया संशोधित नोटिफिकेशन जारी करेगा।
हालांकि एपीपीसीबी ने सभी आवश्यक स्पष्टीकरण दे दिए हैं, लेकिन ईएसी की कानूनी टीम इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही मंत्रालय से अंतिम स्पष्टता मिल जाएगी, परियोजना को स्वचालित रूप से मंजूरी मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है।
यह संयंत्र राज्य की सबसे बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है और इसके शुरू होने से आंध्र प्रदेश में भारी औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
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