Ngt के आदेश के बाद वन विभाग ने प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमित 95 बीघा जमीन मुक्त कराई

Dec 15, 2024 - 23:31
Dec 15, 2024 - 23:44
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Ngt के आदेश के बाद वन विभाग ने प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमित 95 बीघा जमीन मुक्त कराई

राधौगढ़ (आरएनआई) बीते 4 दिसंबर 24 की हुई पेशी में NGT ने राधौगढ़ वृत्त में वन विभाग के पट्टो के प्रचलित प्रकरण में पट्टो को निरस्त करने में लेट लतीफी करने में 11 माह बाद भी कार्यवाही न करने पर गुना कलेक्टर, राधौगढ़ तहसीलदार को ngt ने बुरी तरह फटकार लगाई थी। तब प्रशासन के action mode में दिखने के बाद

शासकीय खसरो का कुल रकबा 100 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 20 हेक्टेयर वन भूमि प्रशासन और वन विभाग ने मुक्त कराई जो अतिक्रमित थी।

जानकार सुविग सूत्र बताते हैं कि इस बड़ी कार्यवाही के बाद अब लगभग 280 बीघा के त्रुटिपूर्ण राजस्व की भूमि के पट्टे की सूक्ष्म जांच होकर मुक्त कराई जा सकती हैं भूमि।

वही सुविग सूत्र बताते हैं कि अब से पूर्व वन अधिकारियों,रेंजरो ओर राजस्व अधिकारियों की लापरवाही के चलते जिले की वन विभाग के जंगल की 6000 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमित हैं,जो गुना जिले की विभिन्न रेन्जो में हैं।

वन विभाग के राधौगढ़ वृत्त के अंतर्गत वन भूमि की लगभग 60 हेक्टेयर पट्टो वाली जमीन एवं अन्य शासकीय जंगल की जमीन के प्रकरण में 04 दिसंबर की पेशी में NGT ने इन्ही पट्टो को निरस्त करने में लेट लतीफी करने में 11 माह बाद भी कार्यवाही न करने हेतु कलेक्टर, तहसीलदार राधौगढ़ को बुरी तरह फटकारा था। तब अतिक्रमण मुक्त अभियान चला। जिनमे प्रशासन ने शासकीय दर्ज जमीन का अतिक्रमित रकबा 20 हेक्टेयर हेक्टेयर को अतिक्रमण से मुक्त कराया। बेदखली की कार्यवाही तो लगातार आज भी चली हैं।

अब शासकीय दर्ज भूमि अतिक्रमण से मुक्त होकर वन विभाग के अधीन होकर उसमें गड्डे, खंती हो गए। 

उल्लेखनीय हैं राधौगढ़ वृत्त के कुल शासकीय खसरो के रकबा 475 बीघा में से कुल 95 बीघा में अतिक्रमण था, जो आज की स्थिति में प्रशासन और वन विभाग ने उसे अतिक्रमितो से पूर्णतः बेदखल कर दिया।

अब विवादित निजी पट्टो के रूप में दर्ज भूमियो की कार्यवाही अब भी प्रशासन की शेष है, जो पट्टो की निरस्तगी उपरांत ही की जा सकेगी।

इस वृत्त में शासकीय खसरो का कुल रकबा लगभग 100 हेक्टेयर है, जिनमे मात्र 20 हेक्टेयर में ही अतिक्रमण था, जिसे बेदखल किया गया है, जो लगभग 95 बीघा के बराबर है। सुविग जानकार सूत्र बताते हैं कि वन भूमि से बेदखली की कार्यवाही तो प्रशासन की कार्यवाही के उपरांत भी वनविभाग ने अपने स्तर पर चालू रखी, क्योंकि इतनी बड़ी 95 बीघा की जमीन को एक दिन में 20 हेक्टेयर में गड्ढे खोदकर अतिक्रमण हटाना सम्भव नही है।

 सेविंग सूत्रो ने बताया कि वैसे 60 हेक्टेयर पट्टो वाली भूमि में लगभग 30 हेक्टेयर में अभी भी घना जंगल खड़ा है। यानी जब पट्टे पूर्व दिए गए, तब घने खड़े जंगल मे पट्टे जारी किए गए। जिसका ध्यान विभागों को रखना चाहिए था,जिसका उस समय वास्तविक ध्यान नहीं रखा गया। यानी अब प्रशासन कार्यवाही करता है तो पट्टे निरस्त होने के बाद मात्र 30 हेक्टेयर में ही बेदखली की जरूरत पड़ेगी।

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