12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण आज से शुरू, अंतिम सूची 7 फरवरी को जारी होगी

Nov 4, 2025 - 10:40
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12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण आज से शुरू, अंतिम सूची 7 फरवरी को जारी होगी

नई दिल्ली (आरएनआई)। देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) मंगलवार से शुरू हो गया है। यह प्रक्रिया 4 दिसंबर तक चलेगी। चुनाव आयोग ने बताया कि इस दौरान मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन का कार्य किया जाएगा। आयोग 9 दिसंबर को मसौदा सूची जारी करेगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

यह देश में मतदाता सूची को अद्यतन और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू किया गया एक बड़ा अभियान है। बिहार में पहले चरण के बाद यह एसआईआर का दूसरा दौर है। इस बार 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 51 करोड़ मतदाता शामिल होंगे।

इस प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़, गोवा, राजस्थान, गुजरात, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप और पुडुचेरी शामिल हैं। इनमें से चार प्रदेश—तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल—में अगले वर्ष मार्च से मई के बीच विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, जबकि बाकी राज्यों में आगामी दो से तीन वर्षों में चुनाव होने हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि यह पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करेगा और मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाएगा। उन्होंने बताया कि असम में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया अलग से होगी, क्योंकि वहां नागरिकता सत्यापन की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है। नागरिकता अधिनियम के विशेष प्रावधानों के कारण असम के लिए अलग समय-सारणी जारी की जाएगी।

इस बीच, तमिलनाडु में एसआईआर को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। पार्टी के संगठन सचिव आर.एस. भारती की ओर से दायर याचिका में चुनाव आयोग की 27 अक्टूबर की अधिसूचना को असंवैधानिक, मनमाना और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया गया है।

द्रमुक ने दलील दी है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21—समानता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार—का उल्लंघन करती है। साथ ही इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के विपरीत बताया गया है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में इसी सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।

चुनाव आयोग ने सभी योग्य नागरिकों से अपील की है कि वे अपने नाम, पते और अन्य विवरणों की जांच करें तथा किसी भी त्रुटि की स्थिति में सुधार कराएं। आयोग के अनुसार, यह विशेष पुनरीक्षण लोकतंत्र की बुनियाद को और मजबूत करेगा तथा आगामी चुनावों की तैयारियों के लिए अहम साबित होगा।

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