भारत की सैन्य शक्ति में बड़ा इजाफा, अमेरिका देगा आधुनिक हथियार और रूस ने किया फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमान का प्रस्ताव
वॉशिंगटन/नई दिल्ली (आरएनआई) भारत की रक्षा क्षमताओं में बड़ा विस्तार होने जा रहा है। एक ओर अमेरिका ने भारत के लिए महत्वपूर्ण हथियार पैकेज को मंजूरी दे दी है, वहीं रूस ने सुखोई-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों की पेशकश की है। दोनों सौदों पर अंतिम मुहर लगने से भारत की सामरिक तैयारी और आधुनिक युद्ध क्षमता और मजबूत होगी।
अमेरिका से आधुनिक हथियारों की डील
अमेरिका ने भारत को 100 ‘जैवेलिन’ एंटी-टैंक मिसाइलें, 25 हल्के कमांड लॉन्च यूनिट और 216 ‘एक्सकैलिबर’ प्रिसिजन आर्टिलरी राउंड देने का प्रस्ताव मंजूर कर दिया है। डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने इस प्रस्ताव की जानकारी अमेरिकी कांग्रेस को भेज दी है, जो किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय रक्षा सौदे की औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
सौदे में शामिल हैं:
100 FGM-148 जैवेलिन एंटी-टैंक मिसाइलें
25 कमांड लॉन्च यूनिट
216 एक्सकैलिबर जीपीएस-गाइडेड आर्टिलरी राउंड
प्रशिक्षण, संचालन, मेंटेनेंस और सुरक्षा से जुड़े सभी तकनीकी सपोर्ट पैकेज
DSCA ने कहा कि यह सौदा भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को नई मजबूती देगा और भारत की सीमाओं की सुरक्षा और भविष्य की रणनीतिक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को बढ़ाएगा। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सौदा दक्षिण एशिया के सैन्य संतुलन को प्रभावित नहीं करेगा।
जैवेलिन मिसाइल की खासियत
जैवेलिन दुनिया की सबसे उन्नत पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइलों में से एक है।
टॉप-अटैक क्षमता – मिसाइल टैंक के ऊपर वाले हिस्से पर हमला करती है, जहां कवच सबसे कम होता है।
सॉफ्ट लॉन्च सिस्टम – इसे इमारतों, बंकरों या बंद कमरों से भी सुरक्षित दागा जा सकता है।
उच्च सटीकता – यूक्रेन युद्ध में रूसी T-72 और T-90 टैंकों को नष्ट करने में इसकी उपयोगिता साबित हुई।
एक्सकैलिबर राउंड क्या करते हैं?
एक्सकैलिबर राउंड GPS-गाइडेड होते हैं, जो तोप से दागे जाने पर भी अपने लक्ष्य पर बेहद सटीक प्रहार करते हैं। इससे अनावश्यक क्षति कम होती है। भारत पहले भी इस तकनीक का उपयोग कर चुका है।
कांग्रेस द्वारा समीक्षा के बाद यदि कोई आपत्ति नहीं होती, तो जल्द ही हथियारों की डिलीवरी शुरू की जा सकेगी।
रूस ने सुखोई-57 स्टील्थ फाइटर की पेशकश की
रूस ने भारत को स्टील्थ कैटेगरी के सुखोई-57 लड़ाकू विमान देने का प्रस्ताव रखा है। खास बात यह है कि प्रस्ताव में इन विमानों का निर्माण भारत में ही करने का सुझाव भी शामिल है।
प्रस्ताव के तहत:
सुखोई-57 का भारत में उत्पादन
आवश्यक तकनीक का ट्रांसफर
यदि भारत चाहे तो दो-सीटर संस्करण भी दोनों देश मिलकर विकसित कर सकते हैं
रूस की प्रमुख रक्षा कंपनी रोस्तेक के सीईओ सेर्गेई चेमेजोव ने बताया कि भारत को यह प्रस्ताव राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित भारत यात्रा से पहले दिया गया है।
रणनीतिक रूप से बड़ा मोड़
अमेरिका और रूस – दोनों से एक साथ बड़ी रक्षा पेशकश मिलने का मतलब है कि भारत सैन्य आधुनिकीकरण के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। जहां अमेरिका से मिल रहे उन्नत हथियार जमीनी युद्ध क्षमता को और मजबूत करेंगे, वहीं रूस का सुखोई-57 ऑफर भारत को भविष्य की हवाई युद्ध क्षमता में बड़ी छलांग दे सकता है।
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