प्रशासनिक सिस्टम की खामी के चलते बारिश में नानाखेड़ी सडक़ सहित अन्य सडक़ों को हुआ नुकसान
जिले में अतिक्रमण पर नही दिया जा रहा ध्यान, नाले पर अवैध अतिक्रमण से पानी निकासी में हो रहा अवरोध, गुनिया नदी, पनरिया नदी, मंडी नाला सहित भुजरिया तालाब और सिंगवासा नाले पर कब्जा से बाढ़ जैसे बन रहे हालात।
गुना (आरएनआई) जिला मुख्यालय गुना सहित जिले की बमोरी, चांचौड़ा, आरोन, राघौगढ़, कुंभराज और मुधूसदनगढ़ आदि तहसीलों में लगातार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि प्रशासनिक सिस्टम की खामी के चलते बारिश में एक ओर जहां नानाखेड़ी मंडी गेट से हाईवे को जोडऩे वाली सडक़ के अलावा अन्य सडक़ों को भी काफी नुकसान हुआ है। वहीं दूसरी ओर समस्या ये है कि शहर से गुजरे नालों, नदियों और तालाबों पर अवैध अतिक्रमण ने पैर पसार लिए हैं। जिसके चलते पानी निकासी में अवरोध पैदा हो रहा है।
अतिक्रमण की वजह से दो-तीन घंटे की अनवरत वारिश में ही गुनिया नदी, पनरिया नदी, मंडी नाला सहित भुजरिया तालाब और सिंगवासा नाले से निकले वाले पानी से बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं।
बावजूद इसके प्रशासन द्वारा बारिश पूर्व कोई तैयारी नही की गई और ना ही सडक़ के दोनों ओर नाले से अतिक्रमण हटाया।
दरअसल मामला ये है कि प्रशासन के बेलगाम अधीनस्थ अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं जो शासन के निर्देशों को ताक पर रखकर चलते हैं।
वर्षों से जिले में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी जतना के प्रति कतई सजग नही हैं और ना ही अपने काम के प्रति कर्तव्यशील। ऐसी स्थिति में शहर की आवाम ने जनता में ईमानदार छवि पेश करने वाले जिले के कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से उम्मीद लगाई है कि वे सिस्टम में थोड़ा बहुत सुधार करेंगे।
वर्तमान में स्थिति ये है कि कार्यवाही के नाम पर नोटिस देकर प्रक्रिया ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है आखिर इसके पीछे कोन है, जनता को कौन देगा इसका जवाब।
जनता का सवाल ये है कि जिले में सिर्फ घटनाएं घटित होने के बाद जागते हैं जिम्मेदार एसडीएम, तहसीलदार, सीएमओ फिर अचानक मौन साधना में क्यों चले जाते हैं, क्या इन्हें सिर्फ हादसे का ही इंतजार रहता है पूछता है गुना।
वर्तमान में बारिश के चलते जर्जर भवनों से कभी भी हो सकती हैं गंभीर घटनाएं जो शहर को गमगीन कर सकती हैं, क्या गुना जिले के जनप्रतिनिधि, विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री इस पर संज्ञान लेंगे। जिससे भूमाफियाओं पर वैधानिक कार्यवाही कर अवैध अतिक्रमण और नालों तथा नदियों के कब्जे हटाए जा सकें।
थोड़ी सी बारिश में इन कालोनियों में भरता है पानी
शहर की गुनिया नदी, पनरिया नदी, मंडी नाला, सिंगवासा नाला और भुजरिया तालाब से निकलने वाले पानी से थोड़ी ही बारिश में बाढ़ जैसे हालत बन जाते हैं।
उक्त नालों को हर साल भूमाफियाओं के द्वारा पाटा जा रहा है। करीब 20 साल पूर्व यह नाले 80-80 फिट थे वह आज 10 से 15 फिट रह गए हैं। जिसकी वजह से पानी के बहाव का दबाव बढ़ जाता है और इनके आसपास की कालोनियों में पानी भर जाता है।
पानी भरने वाली उक्त कालोनियों में सिंगवासा बस्ती, माता मोहल्ला, कैन्ट, काला पाठा, हीराबाग, नूशन का बगीचा, बांसखेड़ी, घोसीपुरा, सदर बाजार रपटा, कर्नलगंज, गोपालपुरा, भगतसिंह कालोनी, भुजारिया तालाब, श्रीराम कालोनी, जगनपुर पत्रकार कालोनी, हड्डीमिल, हाउसिंग बोर्ड, मथुरा नगर, विकास नगर, कुशमौदा, वलवंत नगर, विंध्याचल कालोनी, चांदशाह वली, भार्गव कालोनी, सरस्वती विहार और बूढ़ेबालाजी क्षेत्र की बस्तियों में पानी भर जाता है।
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