दिल्ली में यमुना का जलस्तर घटा, अब बीमारी का खतरा बढ़ा

इससे नदी में पानी तेजी से कम हो रहा है। हथिनीकुंड बैराज से हर घंटे सामान्य मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि दिल्ली से जल निकासी करीब चार गुना ज्यादा हो रहा है। इससे एक-दो दिन में बाढ़ प्रभावित इलाकों में जन जीवन सामान्य हो जाने की उम्मीद है।

Sep 8, 2025 - 10:10
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दिल्ली में यमुना का जलस्तर घटा, अब बीमारी का खतरा बढ़ा

दिल्ली (आरएनआई) दिल्ली में यमुना नदी खतरे के निशान 205.33 मीटर से नीचे पहुंच गई है। इससे नदी में पानी तेजी से कम हो रहा है। हथिनीकुंड बैराज से हर घंटे सामान्य मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि दिल्ली से जल निकासी करीब चार गुना ज्यादा हो रहा है। इससे एक-दो दिन में बाढ़ प्रभावित इलाकों में जन जीवन सामान्य हो जाने की उम्मीद है।

बाढ़ प्रभावित इलाके यमुना बाजार, मॉनेस्ट्री मार्केट से गाद निकाली जा रही है। लोगों के घरों में तीन-चार फुट तक गाद जमा है। इस सीजन में 4 अगस्त को यमुना का अधिकतम जलस्तर 207.48 मीटर तक पहुंचा, लेकिन तीन दिन बाद 7 अगस्त को ही स्थिति फिर से सामान्य होती नजर आई। 2023 में आई बाढ़ को देखते हुए ये माना जा रहा था कि इस बार भी जलभराव की स्थिति लंबी खिंच सकती है, लेकिन पहले से बाढ़ की तैयारियां पूरी होने के कारण स्थिति जल्दी सुधरती दिख रही है।

आईटीओ सहित दिल्ली के सभी बैराज के गेट पहले ही पूरी तरह खोल दिए गए। इससे यमुना के बहाव में अवरोध नहीं पैदा हुआ। पिछली बाढ़ के लिए आईटीओ बैराज के बंद पड़े चार गेट और नदी के बहाव वाले रास्ते में दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल परियोजना के कारण पड़ी मिट्टी और निर्माण कचरा, बड़ी बाधा बने थे। इस कारण दिल्ली को बड़े पैमाने पर बाढ़ की मार झेलनी पड़ी।

आईटीओ चौराहे पर करीब दो महीने पहले सीवेज सिस्टम को नए सिरे से बदला गया। इस कारण इस बार यमुना में बाढ़ के दौरान इस जगह पर सीवेज ओवरफ्लो के कारण जलभराव नहीं हुआ। 2023 में आईटीओ चौराहे से लेकर राजघाट-सराय काले खां फ्लाईओवर तक सड़क तालाब की तरह दिखती थी। कई बार ज्यादा जलभराव के कारण इस रूट पर ट्रैफिक भी बंद करना पड़ा। इस बार यहां बिल्कुल जलभराव नहीं हुआ। इसी तरह से रिंग रोड पर इस बार करीब 20 घंटे जलभराव हुआ, लेकिन पंपों की मदद से पानी जल्द हटाया गया। इस बीच यहां से ट्रैफिक लगातार चलता रहा।

मौजूदा समय हथिनीकुंड बैराज से हर घंटे करीब 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा, जबकि दिल्ली में ओखला बैराज से हर घंटे में एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जा रहा है। इससे उम्मीद है कि सोमवार को यमुना का बहाव भी धीमा नजर आएगा। शाम 7 बजे तक यमुना का जलस्तर 205.38 दर्ज किया गया। पानी हर घंटे करीब दो सेमी नीचे खिसक रहा है।

यमुना का जलस्तर कम होने से थोड़ी राहत तो जरूर मिली है लेकिन मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। बाढ़ पीड़ितों के लिए बिना संसाधन के टेंट में रात-दिन गुजारना परेशानी का सबब बनता जा रहा है। जलस्तर कम होते ही लोग पानी में गोता लगाते हुए अपने घरों की ओर जा रहे हैं ताकि बचा हुआ सामान निकाल सकें।

पीड़ितों का कहना है कि बाढ़ की वजह से जो कुछ भी था, सब बर्बाद हो चुका है। अब संसाधनों की कमी है। यमुना खादर निवासी सुमित कुमार ने बताया कि बाढ़ में सब कुछ खो दिया है। यहां तक कि जो जरूरी कागजात थे, जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और स्कूल की मार्कशीट के साथ अन्य सभी जरूरी प्रमाण पत्र सब यमुना में बह गए। वहीं, पुराना उस्मानपुर निवासी लवकुश ने बताया कि इन टेंटों में जिंदगी बसर करना बहुत मुश्किल है। खाने से लेकर पीने के पानी तक के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उसने कहा कि यहां कुछ एनजीओ वाले आते हैं, जो अभी मदद कर रहे हैं लेकिन यह नाकाफी है। टेंट में कुछ लोगों को खाना मिलता है कुछ को नहीं मिलता है। इसके अलावा कैंपों में चिकित्सा सेवाओं की भी कमी है।

बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि राहत शिविर में रात को मच्छर काटते हैं, जिससे यहां रात गुजारना किसी चुनौती से कम नहीं है। मच्छरजनित बीमारी होने की संभावना बढ़ रही है। राहत शिविर में मच्छरजनित बीमारियों को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से छिड़काव कराया जा रहा है।

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