'लगातार 15 घंटे पूछताछ ज्यादती, पूर्व कांग्रेस विधायक की गिरफ्तारी अवैध', सुप्रीम कोर्ट की ईडी को फटकार

अवैध खनन मामले में कांग्रेस नेता सुरेंद्र पवार को हाईकोर्ट से रिहा किए जाने के फैसले को ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने ईडी की याचिका को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि ईडी की ओर से लगातार 15 घंटे तक कांग्रेस नेता से की गई पूछताछ का आचरण पूरी तरह से अमानवीय था।

Jan 3, 2025 - 19:00
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'लगातार 15 घंटे पूछताछ ज्यादती, पूर्व कांग्रेस विधायक की गिरफ्तारी अवैध', सुप्रीम कोर्ट की ईडी को फटकार

नई दिल्ली (आरएनआई) सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के पूर्व कांग्रेस विधायक सुरेंद्र पंवार को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने अवैध खनन मामले में पूर्व विधायक की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया। साथ ही कांग्रेस नेता से लगभग 15 घंटे तक की गई पूछताछ को ज्यादती बताया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे ईडी का अमानवीय आचरण कहा। 

अवैध खनन मामले में कांग्रेस नेता सुरेंद्र पवार को हाईकोर्ट से रिहा किए जाने के फैसले को ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने ईडी की याचिका को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि ईडी की ओर से लगातार 15 घंटे तक कांग्रेस नेता से की गई पूछताछ का आचरण पूरी तरह से अमानवीय था। क्योंकि यह किसी आतंकी गतिविधि नहीं बल्कि अवैध रेत खनन से जुड़ा मामला था। ऐसे मामले में लोगों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। ईडी ने व्यक्ति को बयान देने के लिए मजबूर किया। यह ठीक नहीं है। 

पीठ ने कहा कि हम उच्च न्यायालय के इस फैसले में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं कि प्रतिवादी की गिरफ्तारी अवैध थी। उच्च न्यायालय ने फैसले में केवल यह तय किया था कि पंवार की गिरफ्तारी अवैध थी या नहीं। इससे पहले दो दिसंबर को शीर्ष अदालत ने एक आदेश में कहा कि हाईकोर्ट का फैसला मनी लॉड्रिंग एक्ट की धारा 44 के तहत लंबित शिकायत को प्रभावित नहीं करेगा। 

ईडी के वकील जोहेब हुसैन ने कहा कि उच्च न्यायालय ने फैसले में गलती की है कि पंवार से लगातार 14.40 घंटे तक पूछताछ की गई। ईडी ने 2024 में अपने अधिकारियों को पूछताछ के कुछ मानकों को बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि लोगों से देर रात और दिन के शुरुआती घंटों में पूछताछ न की जाए।

कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक सुरेंद्र पंवार को हाईकोर्ट ने 29 सितंबर, 2024 को रिहा किया था। अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप अवैध खनन या अवैध रूप से खनन की गई सामग्री की आपूर्ति से संबंधित थे। अवैध खनन एक अपराध है, लेकिन यह खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम और मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत अनुसूचित अपराध नहीं है। इसलिए याचिकाकर्ता पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। 

कांग्रेस नेता सुरेंद्र पंवार से 15 घंटे तक की गई पूछताछ पर हाईकोर्ट ने भी नाराजगी जताई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि ईडी ने खुद कहा कि पंवार को मनी लॉड्रिंग की धारा 50 के तहत समन जारी किया गया था और वह 19 जुलाई 2024 को गुरुग्राम में सुबह करीब 11 बजे एजेंसी के सामने पेश हुए और उनसे 14 घंटे और 40 मिनट तक लगातार पूछताछ की गई। 14 घंटे से अधिक समय तक लगातार की गई पूछताछ मानव गरिमा के विरुद्ध थी। हमें उम्मीद है कि ऐसे मामलों में प्रवर्तन निदेशालय सुधारात्मक उपाय करेगा और अधिकारियों को संदिग्धों के खिलाफ एक बार में जांच के लिए कुछ उचित समय सीमा का पालन करने के लिए संवेदनशील बनाएगा।

20 जुलाई को सोनीपत के तत्कालीन विधायक व कांग्रेस के प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी सुरेंद्र पंवार को पूछताछ के बाद ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने गिरफ्तार किया था। करोड़ों रुपये के धनशोधन व अवैध माइनिंग से जुड़े मामले में विधायक को आरोपी बनाया गया था। अंबाला अदालत में पेश करने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था।  ईडी ने विधायक पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने गलत तरीके से खनन करवाकर कंपनी के जरिए करोड़ों रुपये कमाए हैं।

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