लखनऊ में चिन्तन मंथन शिविर: निजीकरण का विकल्प खारिज, आंदोलन जारी रखने का संकल्प

Oct 12, 2025 - 18:02
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लखनऊ में चिन्तन मंथन शिविर: निजीकरण का विकल्प खारिज, आंदोलन जारी रखने का संकल्प

लखनऊ (आरएनआई)। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने लखनऊ में आयोजित “चिन्तन मंथन शिविर – संदर्भ निजीकरण” में निजीकरण के सभी विकल्पों को खारिज कर दिया और इसके विरोध में आंदोलन तेज करने का संकल्प लिया।

निजीकरण के विकल्प खारिज

शिविर में मुख्य वक्ता, आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल द्वारा दिए गए विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि विकल्प – निजी कंपनी में नौकरी ज्वॉइन करना, अन्य निगमों में वापस जाना, या स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेना – सभी बिजली कर्मियों के भविष्य के लिए हानिकारक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में निजीकरण स्वीकार्य नहीं है।

दीपावली पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति का लक्ष्य

शिविर में यह भी निर्णय लिया गया कि दीपावली के अवसर पर उपभोक्ताओं को रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु अभियंता अतिरिक्त प्रयास करेंगे। इसके लिए 16 अक्टूबर को सभी जनपदों में अभियंता संघ की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें योजना बनाई जाएगी और इसे क्रियान्वित किया जाएगा।

आंदोलन जारी रखने का संकल्प

शिविर में उपस्थित अन्य वक्ताओं जितेन्द्र सिंह गुर्जर, आलोक श्रीवास्तव और जगदीश पटेल ने निजीकरण से होने वाले संभावित नुकसान से बिजली अभियंताओं को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि निजीकरण के टेंडर जारी होते ही सामूहिक “जेल भरो आंदोलन” की तैयारी की जाएगी। संघ ने संकल्प लिया कि 319 दिन से चल रहा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।

वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग और निजीकरण

शिविर में चर्चा हुई कि विद्युत वितरण क्षेत्रों में की जा रही वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का उद्देश्य फ्रेंचाइजी के माध्यम से निजीकरण करना है। इसमें पश्चिमांचल और मध्यांचल के बड़े शहर शामिल हैं। दुबे ने कहा कि जिन शहरों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू की जा रही है, वहां का अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का टेंडर भी निजीकरण के टेंडर के साथ जारी किया जाएगा।

अभियंताओं को प्रशिक्षित करने का उद्देश्य

महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिए प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जाएंगे और मेरठ, आगरा, वाराणसी और लखनऊ में शिविर सफलतापूर्वक हो चुका है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि अभियंता संकल्प लेकर सामने आएं तो उत्तर प्रदेश में पॉवर सेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है।

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